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Shashank Shekhar Pathak
yahii sochta hooñ main har pal mirii jaañ
yahii sochta hooñ main har pal mirii jaañ | यही सोचता हूँ मैं हर पल मिरी जाँ
- Shashank Shekhar Pathak
यही
सोचता
हूँ
मैं
हर
पल
मिरी
जाँ
कि
मुझ
सेे
जुदा
क्यूँँ
है
तक़दीर
तेरी
वो
बिंदी,
वो
काजल,
वो
कानों
में
झुमके
रुलाती
है
अक्सर
वो
तसवीर
तेरी
- Shashank Shekhar Pathak
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चढ़ते
हुवे
ए
शम्स
दिखा
ताव
भी
मगर
ये
जान
ले
कि
शाम
ढले
डूब
जाएगा
Afzal Ali Afzal
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अजीब
हालत
है
जिस्म-ओ-जाँ
की
हज़ार
पहलू
बदल
रहा
हूँ
वो
मेरे
अंदर
उतर
गया
है
मैं
ख़ुद
से
बाहर
निकल
रहा
हूँ
Azm Shakri
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इश्क़
माशूक़
इश्क़
'आशिक़
है
यानी
अपना
ही
मुब्तला
है
इश्क़
Meer Taqi Meer
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इक
ये
भी
तो
अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ
है
ऐ
चारागरो
दर्द
बढ़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
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Farhat Abbas Shah
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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सुनो
हर-वक़्त
इतना
याद
भी
मत
कीजिए
हमको
कहीं
ऐसा
न
हो
की
हिचकियों
में
जाँ
निकल
जाए
Sandeep dabral 'sendy'
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मेरी
ही
जान
के
दुश्मन
हैं
नसीहत
वाले
मुझ
को
समझाते
हैं
उन
को
नहीं
समझाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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पहले
तो
तुम्हें
जान
पुकारेंगे
यही
लोग
फिर
ख़ुद
ही
तुम्हें
जान
से
मारेंगे
यही
लोग
मुँह
पर
तो
बड़े
फ़ख्र
से
ता'ईद
करेंगे
फिर
पीठ
में
खंज़र
भी
उतारेंगे
यही
लोग
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Ashraf Ali
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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जल
चुका
है
जिस्म
मेरा
राख
हूँ
मैं
पर
मुझे
अब
भी
मिली
राहत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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दिल
की
ख़ातिर
एक
रिश्ते
को
बचाने
के
लिए
आग
मैंने
ही
लगा
ली
ख़ुद
मिरे
घरबार
में
Shashank Shekhar Pathak
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मिलने
आए
या
न
आए
मेरे
ख़्वाबों
में
तू
तेरे
तसव्वुर
को
मैं
ख़्वाब
बना
लेता
हूँ
तेरे
जाने
का
ग़म
तो
है
मगर
इतना
नहीं
तेरी
तस्वीर
से
अब
काम
चला
लेता
हूँ
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Shashank Shekhar Pathak
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बड़ी
अच्छी
लगी
आदत
तुम्हारी
बदलना
पर
नहीं
फ़ितरत
हमारी
चलाए
तीर
तुमने
दिल
पे
ऐसे
कि
घाइल
हो
गए
जो
थे
शिकारी
कभी
रोया,
कभी
सोया
नहीं
मैं
सितारे
गिन
कभी
रातें
गुज़ारी
बहुत
एहसान
हैं
मुझ
पर
तुम्हारे
बहुत
जल्दी
चुका
दूँगा
उधारी
नहीं
चलता
कभी
जो
दाव
कोई
वही
है
अस्ल
में
असली
जुआरी
मोहब्बत
थी
तभी
तो
चुप
रहा
मैं
मुझे
आती
नहीं
क्या
होशियारी
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Shashank Shekhar Pathak
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ऐसे
बिछड़े
हैं
हम
दोनों
अब
के
मुश्किल
मिल
पाना
है
इक
काग़ज़
की
कश्ती
है
और
पार
दरिया
के
जाना
है
Shashank Shekhar Pathak
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