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Shashank Shekhar Pathak
ba
ba | बड़ी अच्छी लगी आदत तुम्हारी
- Shashank Shekhar Pathak
बड़ी
अच्छी
लगी
आदत
तुम्हारी
बदलना
पर
नहीं
फ़ितरत
हमारी
चलाए
तीर
तुमने
दिल
पे
ऐसे
कि
घाइल
हो
गए
जो
थे
शिकारी
कभी
रोया,
कभी
सोया
नहीं
मैं
सितारे
गिन
कभी
रातें
गुज़ारी
बहुत
एहसान
हैं
मुझ
पर
तुम्हारे
बहुत
जल्दी
चुका
दूँगा
उधारी
नहीं
चलता
कभी
जो
दाव
कोई
वही
है
अस्ल
में
असली
जुआरी
मोहब्बत
थी
तभी
तो
चुप
रहा
मैं
मुझे
आती
नहीं
क्या
होशियारी
- Shashank Shekhar Pathak
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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इश्क़
को
एक
उम्र
चाहिए
और
उम्र
का
कोई
ए'तिबार
नहीं
Jigar Barelvi
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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रास्ता
जब
इश्क़
का
मौजूद
है
फिर
किसी
की
क्यूँँ
इबादत
कीजिए?
ख़ुद-कुशी
करना
बहुत
आसान
है
कुछ
बड़ा
करने
की
हिम्मत
कीजिए
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Bhaskar Shukla
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सुने
हैं
मोहब्बत
के
चर्चे
बहुत
सुना
है
कि
हैं
इस
में
ख़र्चे
बहुत
नतीजे
मोहब्बत
के
आए
नहीं
भरे
थे
मगर
हम
ने
पर्चे
बहुत
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S M Afzal Imam
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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उन
का
जो
फ़र्ज़
है
वो
अहल-ए-सियासत
जानें
मेरा
पैग़ाम
मोहब्बत
है
जहाँ
तक
पहुँचे
Jigar Moradabadi
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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यही
सोचता
हूँ
मैं
हर
पल
मिरी
जाँ
कि
मुझ
सेे
जुदा
क्यूँँ
है
तक़दीर
तेरी
वो
बिंदी,
वो
काजल,
वो
कानों
में
झुमके
रुलाती
है
अक्सर
वो
तसवीर
तेरी
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Shashank Shekhar Pathak
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अगर
हो
ग़म-ज़दा
तो
भी
कहाँ
नाशाद
रहती
है
'अलीगढ़'
की
है
वो
लेकिन
'अमीनाबाद'
रहती
है
मोहब्बत
में
ज़रा
हट
कर
लिया
था
फ़ैसला
उसने
अधूरी
गर
मोहब्ब़त
हो
तभी
आबाद
रहती
है
सितंबर
डेट
थी
सोलह
गई
थी
छोड़कर
जब
वो
यही
तारीख़
है
वो
जो
हमेशा
याद
रहती
है
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Shashank Shekhar Pathak
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मिलने
आए
या
न
आए
मेरे
ख़्वाबों
में
तू
तेरे
तसव्वुर
को
मैं
ख़्वाब
बना
लेता
हूँ
तेरे
जाने
का
ग़म
तो
है
मगर
इतना
नहीं
तेरी
तस्वीर
से
अब
काम
चला
लेता
हूँ
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Shashank Shekhar Pathak
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जुर्म
किसका
किसके
सर
इल्ज़ाम
आया
आज
रोया
जाके
तब
आराम
आया
हो
रही
थी
जंग
उसके
नाम
पर
और
वो
ही
मेरे
दुश्मनों
के
काम
आया
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Shashank Shekhar Pathak
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फ़क़त
इक
तिरी
याद
आती
रही
है
तू
आया
नहीं
फिर
शहर
जाने
के
बा'द
तू
इक
मर्तबा
बस
मिरा
नाम
लेना
कभी
याद
आऊँ
जो
मर
जाने
के
बा'द
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Shashank Shekhar Pathak
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