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Shashank Shekhar Pathak
jo tu nahin to kuchh nahin mujhko muyassar lagta hai
jo tu nahin to kuchh nahin mujhko muyassar lagta hai | जो तू नहीं तो कुछ नहीं मुझको मुयस्सर लगता है
- Shashank Shekhar Pathak
जो
तू
नहीं
तो
कुछ
नहीं
मुझको
मुयस्सर
लगता
है
तू
हो
अगर
तो
मुझको
कतरा
भी
समुंदर
लगता
है
है
हाल
क्या
क्या
मैं
कहूँ
जब
से
गई
हो
छोड़कर
दिल
भी
नहीं
लगता
कहीं
घर
भी
कहाँ
घर
लगता
है
- Shashank Shekhar Pathak
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हसीन
यादों
के
चाँद
को
अलविदा'अ
कह
कर
मैं
अपने
घर
के
अँधेरे
कमरों
में
लौट
आया
Hasan Abbasi
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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हमारे
घर
के
रिश्तों
में
अभी
बारीकियाँ
कम
हैं
भतीजा
मार
खाता
है
तो
चाचा
बोल
देते
हैं
Nirbhay Nishchhal
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चराग़
घर
का
हो
महफ़िल
का
हो
कि
मंदिर
का
हवा
के
पास
कोई
मसलहत
नहीं
होती
Waseem Barelvi
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सब
कुछ
तो
है
क्या
ढूँडती
रहती
हैं
निगाहें
क्या
बात
है
मैं
वक़्त
पे
घर
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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गुमान
है
या
किसी
विश्वास
में
है
सभी
अच्छे
दिनों
की
आस
में
है
ये
कैसा
जश्न
है
घर
वापसी
का
अभी
तो
राम
ही
वनवास
में
है
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Azhar Iqbal
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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इश्क़
कहता
है
भटकते
रहिए
और
तुम
कहते
हो
घर
जाना
है
Madan Mohan Danish
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के
तुझे
कहाँ
मुझ
पर
ऐतबार
होता
था?
दर्द
होता
था
जब
तो
बेश़ुमार
होता
था
उस
दरख़्त
पर
अब
आते
नहीं
परिंदे
भी
जिसकी
छाँव
को
तेरा
इंतज़ार
होता
था
सूइयां
भी
चुभ
जातीं
उँगलियों
में
गर
तेरी
तीर
मेरे
भी
दिल
के
आर-पार
होता
था
क्या
बताऊँ
के
क्या
हासिल
हुआ
मोहब्बत
में?
बारिशों
को
कब
सहराओं
से
प्यार
होता
था?
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Shashank Shekhar Pathak
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तेरी
अंँगड़ाई
के
आलम
का
ख़याल
आया
जब
ज़ेहन-ए-वीरांँ
में
खनकने
लगे
कंगन
कितने
Shashank Shekhar Pathak
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तेरे
आने
की
ख़ुशी
है
न
है
फ़ुर्क़त
का
ग़म
ग़म
ये
है
बीत
गए
प्यार
के
सावन
कितने
Shashank Shekhar Pathak
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जीते
जी
मरना
होता
है
तुम
क्या
जानो
क्या
होता
है
इश्क़
करोगे
तब
समझोगे
इश्क़
नहीं
पूरा
होता
है
मिलना
और
बिछड़
जाना
है
खेल
नहीं
किस्मत
का
'पाठक'
हो
ही
जाता
है
वो
अक्सर
होना
जिसे
जुदा
होता
है
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Shashank Shekhar Pathak
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अकेले
ही
तुम्हें
करना
पड़ेगा
तय
सफ़र
यारों
कहाँ
आता
यहाँ
है
काम
कोई
वक़्त
पर
यारों
Shashank Shekhar Pathak
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