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Sohil Barelvi
saal ka aakhiri din hai aaj
saal ka aakhiri din hai aaj | साल का आख़िरी दिन है आज
- Sohil Barelvi
साल
का
आख़िरी
दिन
है
आज
आज
तो
याद
कर
लो
हमें
- Sohil Barelvi
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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बारे
दुनिया
में
रहो
ग़म-ज़दा
या
शाद
रहो
ऐसा
कुछ
कर
के
चलो
याँ
कि
बहुत
याद
रहो
Meer Taqi Meer
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हम
हार
गए
तुम
जीत
गए
हम
ने
खोया
तुम
ने
पाया
इन
छोटी
छोटी
बातों
का
हम
कोई
ख़याल
नहीं
करते
Wali Aasi
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'अमीर'
अब
हिचकियाँ
आने
लगी
हैं
कहीं
मैं
याद
फ़रमाया
गया
हूँ
Ameer Minai
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कभी
पहले
नहीं
था
जिस
क़दर
मजबूर
हूँ
मैं
आज
नज़र
आऊँ
न
ख़ुद
क्या
तुम
सेे
इतना
दूर
हूँ
मैं
आज
तुम्हारे
ज़ख़्म
को
ख़ाली
नहीं
जाने
दिया
मैंने
तुम्हारी
याद
में
ही
चीख़
के
मशहूर
हूँ
मैं
आज
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SHIV SAFAR
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फिर
उसी
सितमगर
को
याद
कर
रहे
हैं
हम
यानी
बे-वजह
ग़म
ईजाद
कर
रहे
हैं
हम
Harsh saxena
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आप
की
याद
आती
रही
रात
भर
चश्म-ए-नम
मुस्कुराती
रही
रात
भर
Makhdoom Mohiuddin
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अपनी
तन्हाई
मिरे
नाम
पे
आबाद
करे
कौन
होगा
जो
मुझे
उस
की
तरह
याद
करे
Parveen Shakir
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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चुप
हो
जाते
या
रोते
हैं
सब
के
अपने
दुख
होते
हैं
जिन
का
भरोसा
काॅंधों
पर
हो
अपना
बोझ
वो
ख़ुद
ढोते
हैं
कल
की
भूख
सताए
जिनको
वो
बेचारे
कम
सोते
हैं
दिल
में
चुभ
जाते
हैं
सच
मुच
ऐसे
भी
सपने
होते
हैं
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Sohil Barelvi
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क़ैद
ख़ाने
से
कम
नहीं
दुनिया
मर
के
आज़ाद
होना
पड़ता
है
Sohil Barelvi
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किसी
ने
बक
दिया
सारे
जहाँ
में
किसी
ने
पेट
में
बातें
रखी
हैं
Sohil Barelvi
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मुझे
इस
बात
का
डर
खा
रहा
है
कोई
सच
मुच
बदलता
जा
रहा
है
मैं
सच
का
सामना
करने
लगा
हूँ
मुझे
भी
आइना
अब
भा
रहा
है
मुझे
भी
जानना
है
जल्द
ही
अब
तू
इतना
क्यूँँ
बदलता
जा
रहा
है
मैं
सब
से
हट
के
चलना
चाहता
हूँ
कोई
मेरी
तरफ़
क्यूँँ
आ
रहा
है
तिरे
दीदार
में
कैसी
कशिश
थी
मिरा
चेहरा
दमकता
जा
रहा
है
कोई
अंदर
ही
अंदर
रोने
वाला
मेरी
लिक्खी
ग़ज़ल
को
गा
रहा
है
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Sohil Barelvi
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एक
शाइर
ने
दिल-ओ-जान
लगा
दी
इन
में
कोई
अश'आर
के
मफ़्हूम
को
छूकर
देखे
Sohil Barelvi
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