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Sohil Barelvi
mujhe is baat ka dar kha raha hai
mujhe is baat ka dar kha raha hai | मुझे इस बात का डर खा रहा है
- Sohil Barelvi
मुझे
इस
बात
का
डर
खा
रहा
है
कोई
सच
मुच
बदलता
जा
रहा
है
मैं
सच
का
सामना
करने
लगा
हूँ
मुझे
भी
आइना
अब
भा
रहा
है
मुझे
भी
जानना
है
जल्द
ही
अब
तू
इतना
क्यूँँ
बदलता
जा
रहा
है
मैं
सब
से
हट
के
चलना
चाहता
हूँ
कोई
मेरी
तरफ़
क्यूँँ
आ
रहा
है
तिरे
दीदार
में
कैसी
कशिश
थी
मिरा
चेहरा
दमकता
जा
रहा
है
कोई
अंदर
ही
अंदर
रोने
वाला
मेरी
लिक्खी
ग़ज़ल
को
गा
रहा
है
- Sohil Barelvi
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ज़रा
ख़ामोश
हो
जा
ऐ
समुंदर
बहुत
हस्सास
हूँ
मैं
आज
सच-मुच
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यूँँ
तो
दुनिया
में
बेकल
रहे
हैं
हौसले
से
मगर
चल
रहे
हैं
Sohil Barelvi
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हम
जबीं
चूम
कर
चले
आए
काँपता
रह
गया
बदन
उस
का
Sohil Barelvi
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सब
लोग
मय-कदे
से
रवाँ
हो
गए
थे
जब
शाना-ब-शाना
मैं
भी
उदासी
के
हो
लिया
Sohil Barelvi
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मुझ
को
जब
भी
मिली
ख़ुशी
सोहिल
छीन
कर
चल
दी
बे-दिली
सोहिल
तंग
जब
करती
ज़िंदगी
सोहिल
जी
में
आती
है
ख़ुद-कुशी
सोहिल
जब
से
कुछ
लोग
इस
जहाँ
से
गए
मेरी
दुनिया
उजड़
गई
सोहिल
देखा
जलता
हुआ
मकाँ
जब
से
मैं
ने
देखी
न
रौशनी
सोहिल
मुझ
से
तन्हाई
में
लिपट
जाए
अब
उदासी
ख़ुशी
ख़ुशी
सोहिल
ख़ूब-सूरत
नहीं
किसी
सूरत
मैं
ने
दुनिया
भी
देख
ली
सोहिल
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Sohil Barelvi
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