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Sohil Barelvi
is nazar se na dekhiye mujh ko
is nazar se na dekhiye mujh ko | इस नज़र से न देखिए मुझ को
- Sohil Barelvi
इस
नज़र
से
न
देखिए
मुझ
को
आँख
पर
बोझ
पड़
रहा
होगा
- Sohil Barelvi
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तिरे
जमाल
की
तस्वीर
खींच
दूँ
लेकिन
ज़बाँ
में
आँख
नहीं
आँख
में
ज़बान
नहीं
Jigar Moradabadi
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हुस्न
को
हुस्न
बनाने
में
मिरा
हाथ
भी
है
आप
मुझ
को
नज़र-अंदाज़
नहीं
कर
सकते
Rais Farog
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तू
अपने
सारे
दुख
जाकर
बताता
है
जिन्हें,
इक
दिन
बढ़ाएँगे
वही
ग़म-ख़्वार
तेरी
आँख
का
पानी
Siddharth Saaz
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मुझे
तो
उसका
भीतरी
ग़ुबार
है
निकालना
सो
आँख
चूमता
हूँ
उसके
होंठ
चूमता
नहीं
Siddharth Saaz
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तुम्हारा
काम
इतना
है
कि
बस
काजल
लगा
लेना
तुम्हारी
आँख
की
ख़ातिर
नज़ारे
मैं
बनाऊँगा
Khalid Nadeem Shani
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इक
नज़र
उस
चेहरे
की
देखी
है
जब
से
यार
मुँह
उतरा
हुआ
है
रौशनी
का
Harsh saxena
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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वफ़ा
नज़र
नहीं
आती
कहीं
ज़माने
में
वफ़ा
का
ज़िक्र
किताबों
में
देख
लेते
हैं
Hafeez Banarasi
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नज़ारे
आँख
में
चुभने
लगे
हैं
यहाँ
हम
साथ
आते
थे
तुम्हारे
Nitesh Kushwah
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ये
इम्तियाज़
ज़रूरी
है
अब
इबादत
में
वही
दु'आ
जो
नज़र
कर
रही
है
लब
भी
करें
Abhishek shukla
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सब
से
इतना
न
मैं
जुदा
होता
काश
थोड़ा
पढ़ा
लिखा
होता
मेरी
वहशत
ही
उस
को
ले
डूबी
मैं
न
होता
तो
ना-ख़ुदा
होता
इश्क़
में
कुछ
न
कुछ
किया
सब
ने
कुछ
न
होता
तो
कुछ
जुदा
होता
मैं
न
होता
मगर
मेरे
हमदम
कोई
मुझ
सा
तो
आपका
होता
रात
के
ढाई
बज
चुके
सोहिल
कोई
लम्हा
तो
रात
सा
होता
मैं
जहाँ
ख़ुश
हूँ
जिस
तरह
ख़ुश
हूँ
कोई
होता
तो
मर
गया
होता
कौन
सोहिल
ख़ुदा
ख़ुदा
चिल्लाए
वो
जो
होता
तो
जा-ब-जा
होता
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Sohil Barelvi
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खरा
खोटा
तुम्हें
जब
बोलते
हैं
सब
कोई
मजबूर
सिसकी
भर
के
रोता
है
Sohil Barelvi
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तेरे
हिस्से
की
तीरगी
मुझ
को
आख़िरश
देख
ले
मिली
मुझ
को
मैं
अकेला
नहीं
हूँ
कमरे
में
तेरी
तस्वीर
तक
रही
मुझ
को
रात
के
तीन
चार
बजने
पर
आज
कल
नींद
आ
रही
मुझ
को
रोज़
मैं
तीरगी
से
लड़ता
था
आज
हासिल
है
रौशनी
मुझ
को
सैकड़ों
बुत
बना
दिए
रब
ने
तेरी
सूरत
लगी
भली
मुझ
को
क्यूँँ
समझता
नहीं
है
चारा-गर
भूख
लगती
है
इक
घड़ी
मुझ
को
मैं
भी
हँसता
था
भूल
जाऊँगा
इतना
चाहेगी
ख़ामुशी
मुझ
को
मैं
ने
दुनिया
को
ख़ूब
जाना
है
काश
दुनिया
भी
जानती
मुझ
को
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Sohil Barelvi
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जो
वादे
किए
हैं
निभाते
रहेंगे
मोहब्बत
की
लौ
को
बढ़ाते
रहेंगे
तू
चाहे
न
चाहे
मगर
हम
मुसलसल
तुझे
याद
आए
हैं
आते
रहेंगे
चलो
कितनी
चालें
चलोगे
रक़ीबों
तुम्हें
आइना
हम
दिखाते
रहेंगे
कोई
तो
ज़माने
में
होगा
हमारा
जिसे
दर्द
दिल
का
सुनाते
रहेंगे
नहीं
होगा
तू
तो
ये
तस्वीर
तेरी
कलेजे
से
अपने
लगाते
रहेंगे
मोहब्बत
के
मज़दूर
हैं
हम
तो
सोहिल
कमाते
रहे
हैं
कमाते
रहेंगे
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Sohil Barelvi
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चौंकना
मत
न
कोई
सुब्ह
को
मातम
करना
हम
किसी
रात
अचानक
से
चले
जाएँ
अगर
Sohil Barelvi
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