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Sohil Barelvi
chaunkna mat na koii subah ko maatam karna
chaunkna mat na koii subah ko maatam karna | चौंकना मत न कोई सुब्ह को मातम करना
- Sohil Barelvi
चौंकना
मत
न
कोई
सुब्ह
को
मातम
करना
हम
किसी
रात
अचानक
से
चले
जाएँ
अगर
- Sohil Barelvi
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मैं
जिस
के
साथ
कई
दिन
गुज़ार
आया
हूँ
वो
मेरे
साथ
बसर
रात
क्यूँँ
नहीं
करता
Tehzeeb Hafi
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क्या
बैठ
जाएँ
आन
के
नज़दीक
आप
के
बस
रात
काटनी
है
हमें
आग
ताप
के
कहिए
तो
आप
को
भी
पहन
कर
मैं
देख
लूँ
मा'शूक़
यूँँ
तो
हैं
ही
नहीं
मेरी
नाप
के
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Farhat Ehsaas
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यहाँ
पे
कल
की
रात
सर्द
थी
हर
एक
रोज़
से
सो
रात
भर
बुझा
नहीं
तुम्हारी
याद
का
अलाव
Siddharth Saaz
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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हमारी
याद
आने
पर
अकेली
रात
में
तुम
भी
कभी
पंखा
कभी
टीवी
कभी
दीवार
देखोगे
Ambar
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ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
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जब
चली
ठंडी
हवा
बच्चा
ठिठुर
कर
रह
गया
माँ
ने
अपने
ला'ल
की
तख़्ती
जला
दी
रात
को
Sibt Ali Saba
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तन्हाई
के
हुजूम
में
वो
एक
तेरी
याद
जैसे
अँधेरी
रात
में
जलता
हुआ
दिया
Sagheer Lucky
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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है
किसी
जालिम
उदू
की
घात
दरवाज़े
में
है
या
मसाफ़त
है
नई
या
रात
दरवाज़े
में
है
जिस
तरहा
उठती
है
नजरें
बे-इरादा
बार-बार
साफ़
लगता
है
के
कोई
बात
दरवाजे
में
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Farhat Abbas Shah
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कौन
सुनेगा
दुखड़े
मेरे
मैं
वो
पेड़
हूँ
जिस
की
जड़
पर
पानी
कह
कर
सब
ने
अब
तक
बस
तेज़ाब
ही
डाला
है
Sohil Barelvi
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अपने
रूठे
मना
रहा
सोहिल
ख़ास
रिश्ते
बचा
रहा
सोहिल
इस
क़दर
लीन
हूँ
मोहब्बत
में
प्यार
दुश्मन
पे
आ
रहा
सोहिल
यार
नाराज़
है
बहुत!
मतलब
प्यार
की
सम्त
जा
रहा
सोहिल
पूरी
दुनिया
का
दुख
मेरे
घर
में
इक
दरीचे
से
आ
रहा
सोहिल
रोज़
लगता
है!
मुझ
को
अंदर
से
कोई
आसेब
खा
रहा
सोहिल
सिर्फ़
अपने
हैं
मेरे
दिल
में
फिर
कौन
दिल
को
दुखा
रहा
सोहिल
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Sohil Barelvi
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देर
से
इतनी
अपने
घर
पहुँचा
घर
में
जो
था
वो
अब
रहा
ही
नहीं
Sohil Barelvi
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जब
से
ले
कर
गया
तेरा
साया
मैं
कभी
लौट
ही
नहीं
पाया
मेरे
दिल
में
तो
आया
मर
जाऊँ
तेरे
दिल
में
कभी
नहीं
आया
दुख
से
तर
थे
मेरे
कई
अश'आर
जिन
को
इरशाद
कर
नहीं
पाया
बात
जो
वक़्त
पर
कही
जाती
बाद
मुद्दत
के
होंट
पर
लाया
मुझ
को
उस
का
भी
हो
गया
एहसास
जो
सितम
आपने
नहीं
ढाया
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Sohil Barelvi
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दीवार-ओ-दर
चुप
थे
सो
घर
की
घर
में
बात
रही
Sohil Barelvi
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