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Sohil Barelvi
ik din ki bhi judaai na bardaasht kar sake
ik din ki bhi judaai na bardaasht kar sake | इक दिन की भी जुदाई न बर्दाश्त कर सके
- Sohil Barelvi
इक
दिन
की
भी
जुदाई
न
बर्दाश्त
कर
सके
दुख
दर्द
मुझ
को
देख
के
इक
दम
लिपट
गए
- Sohil Barelvi
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दो
घड़ी
को
पास
आया
था
कोई
दिल
पे
बरसों
हुक्मरानी
कर
गया
Subhan Asad
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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उतर
कर
आसमानों
से
ज़मीं
की
ख़ाक
पर
बैठो
ख़ुदा
ने
सब
सेे
ऊँची
आपको
मसनद
अता
की
है
Pawan mahabodhi
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आँख
में
पानी
रखो,
होंटों
पे
चिंगारी
रखो
ज़िंदा
रहना
है
तो
तरकीबें
बहुत
सारी
रखो
Rahat Indori
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खड़ा
हूँ
आज
भी
रोटी
के
चार
हर्फ़
लिए
सवाल
ये
है
किताबों
ने
क्या
दिया
मुझ
को
Nazeer Baaqri
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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भेज
देता
हूँ
मगर
पहले
बता
दूँ
तुझ
को
मुझ
से
मिलता
नहीं
कोई
मिरी
तस्वीर
के
बाद
Umair Najmi
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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जब
बुरा
वक़्त
चल
रहा
हो
तो
अच्छी
बातें
भी
ज़हर
लगती
हैं
Sohil Barelvi
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मेरी
मंज़िल
का
रास्ता
मुझ
को
एक
पंछी
दिखा
रहा
मुझ
को
उस
नगर
से
किया
जुदा
मुझ
को
कोई
अपना
नहीं
रहा
मुझ
को
तेरे
पहलू
से
ख़ूब
भटकाया
मेरी
किस्मत
ने
जा-ब-जा
मुझ
को
हादसा
ये
भी
कुछ
जुदा
सा
है
बुझता
दीपक
जला
रहा
मुझ
को
एक
रिश्ता
तबाह
कर
डाला
शक
की
दीमक
ने
खा
लिया
मुझ
को
बाद
जाने
के
आप
के
मिलता
हू-ब-हू
कोई
आप
सा
मुझ
को
हाए
पहचानता
नहीं
सोहिल
अब
तो
घर
का
भी
आइना
मुझ
को
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Sohil Barelvi
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पासबाँ
हूँ
मैं
दोस्त
जिस
शय
का
वो
किसी
और
की
अमानत
है
Sohil Barelvi
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जो
ज़िंदा
हैं
न
मुर्दा
हैं
बहुत
तकलीफ़
में
होंगे
मिरे
भगवान
उन
की
आत्मा
को
शांति
देना
Sohil Barelvi
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साँस
आए
कभी
चली
जाए
हार
जाएँ
या
मात
दी
जाए
ऊबने
लग
गया
हूँ
अब
मौला
मेरे
अंदर
से
ख़ामुशी
जाए
क्या
मरज़
है
मुझे
पता
हो
गया
अब
तो
दिल
से
ये
बेकली
जाए
बस
ये
कहता
रहा
फ़क़त
रोगी
मौत
आ
जाए
ज़िंदगी
जाए
कुछ
मरीज़ों
से
मैं
तो
बेहतर
हूँ
हाए
कुछ
की
तो
क्या
कही
जाए
कौन
ज़िंदा
है
अस्पतालों
में
मौत
बिस्तर
टटोलती
जाए
एक
हस्सास
आदमी
की
व्यथा
एक
औरत
से
क्या
कही
जाए
ज़ीस्त
मुझ
को
अज़ीज़
है
'सोहिल'
मौत
सीने
से
क्यूँँ
लगी
जाए
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Sohil Barelvi
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