hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Sohaib Alvi
reshmi zulfon ke tum apni ishaare samjho
reshmi zulfon ke tum apni ishaare samjho | रेशमी ज़ुल्फ़ों के तुम अपनी इशारे समझो
- Sohaib Alvi
रेशमी
ज़ुल्फ़ों
के
तुम
अपनी
इशारे
समझो
आज
रंगीन
करें
रात
क़रीब
आ
जाओ
- Sohaib Alvi
Download Sher Image
क्या
बैठ
जाएँ
आन
के
नज़दीक
आप
के
बस
रात
काटनी
है
हमें
आग
ताप
के
कहिए
तो
आप
को
भी
पहन
कर
मैं
देख
लूँ
मा'शूक़
यूँँ
तो
हैं
ही
नहीं
मेरी
नाप
के
Read Full
Farhat Ehsaas
Send
Download Image
44 Likes
उस
के
ख़त
रात
भर
यूँँ
पढ़ता
हूँ
जैसे
कल
इम्तिहान
हो
मेरा
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
56 Likes
सियाह
रात
नहीं
लेती
नाम
ढलने
का
यही
तो
वक़्त
है
सूरज
तिरे
निकलने
का
Shahryar
Send
Download Image
66 Likes
दिन
में
मिल
लेते
कहीं
रात
ज़रूरी
थी
क्या?
बेनतीजा
ये
मुलाक़ात
ज़रूरी
थी
क्या
मुझ
सेे
कहते
तो
मैं
आँखों
में
बुला
लेता
तुम्हें
भीगने
के
लिए
बरसात
ज़रूरी
थी
क्या
Read Full
Abrar Kashif
Send
Download Image
82 Likes
बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
Read Full
Hameed Sarwar Bahraichi
Send
Download Image
11 Likes
मैं
न
सोया
रात
सारी
तुम
कहो
बिन
मेरे
कैसे
गुज़ारी,
तुम
कहो
हिज्र,
आँसू,
दर्द,
आहें,
शा'इरी
ये
तो
बातें
थीं
हमारी,
तुम
कहो
Read Full
Prakhar Kanha
Send
Download Image
53 Likes
सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
Send
Download Image
25 Likes
वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
AMAN RAJ SINHA
Send
Download Image
16 Likes
किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
Send
Download Image
53 Likes
इक
ओर
तेरा
ख़्वाब
जो
हर
रात
आता
है
दूजा
वो
अपना
वस्ल
जो
हो
ही
नहीं
रहा
Aqib khan
Send
Download Image
2 Likes
Read More
दुनिया
मुझ
सेे
झगड़
के
बैठ
गई
और
मैं
उस
सेे
झगड़
के
बैठ
गया
Sohaib Alvi
Send
Download Image
4 Likes
इक
तो
फ़ुर्सत
ही
नहीं
दफ़्तर
से
मुझको
हाए
रे!
ऊपर
से
ये
कमबख़्त
औरत
Sohaib Alvi
Send
Download Image
3 Likes
नील-ओ-नल
अगर
सेना
में
नहीं
भी
होते
तो
'राम'
नाम
के
पत्थर
फिर
भी
तैर
जाने
थे
Sohaib Alvi
Send
Download Image
3 Likes
बेल
उस
दर
की
बजा
आया
मैं
रह
गया
तकता
दरीचा
मुझको
Sohaib Alvi
Send
Download Image
2 Likes
दे
नहीं
सकता
फ़ाइदा
मुझको
यार
लगता
है
बे-वफ़ा
मुझको
रस्सी
पंखा
है
मेज
टेबल
है
अपनी
जानिब
को
खींचता
मुझको
होंठों
को
तेरे
चूम
लूँगा
मैं
आँख
भर
के
न
देखना
मुझको
याद
में
उसकी
रातें
कटती
हैं
हिज्र
दीमक
सा
चाटता
मुझको
लड़का
तो
मैं
भी
भोला
भाला
था
हो
गया
है
ये
क्या
से
क्या
मुझको
आप
क्यूँँ
बार
बार
आते
हैं
आने
भी
दीजिए
हवा
मुझको
नील
तक
तो
मुझे
दे
पाया
नहीं
ख़ाक
देगा
तू
रास्ता
मुझको
मीर
ग़ालिब
ही
करता
रहता
है
चल
अली
की
ग़ज़ल
सुना
मुझको
दुनिया
लेती
हैं
मशवरा
मुझ
सेे
आप
देते
हैं
मशवरा
मुझको
Read Full
Sohaib Alvi
Download Image
3 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Haalaat Shayari
Aasra Shayari
Baarish Shayari
Irada Shayari
Husn Shayari