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Sohaib Alvi
de nahin saka faayda mujhko
de nahin saka faayda mujhko | दे नहीं सकता फ़ाइदा मुझको
- Sohaib Alvi
दे
नहीं
सकता
फ़ाइदा
मुझको
यार
लगता
है
बे-वफ़ा
मुझको
रस्सी
पंखा
है
मेज
टेबल
है
अपनी
जानिब
को
खींचता
मुझको
होंठों
को
तेरे
चूम
लूँगा
मैं
आँख
भर
के
न
देखना
मुझको
याद
में
उसकी
रातें
कटती
हैं
हिज्र
दीमक
सा
चाटता
मुझको
लड़का
तो
मैं
भी
भोला
भाला
था
हो
गया
है
ये
क्या
से
क्या
मुझको
आप
क्यूँँ
बार
बार
आते
हैं
आने
भी
दीजिए
हवा
मुझको
नील
तक
तो
मुझे
दे
पाया
नहीं
ख़ाक
देगा
तू
रास्ता
मुझको
मीर
ग़ालिब
ही
करता
रहता
है
चल
अली
की
ग़ज़ल
सुना
मुझको
दुनिया
लेती
हैं
मशवरा
मुझ
सेे
आप
देते
हैं
मशवरा
मुझको
- Sohaib Alvi
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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मैंने
चाहा
भी
कि
फिर
इस
संग-दिल
पे
फूल
उगे
पर
तुम्हारी
रुख़्सती
के
बाद
ये
होता
नहीं
Siddharth Saaz
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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हज़ार
बर्क़
गिरे
लाख
आँधियाँ
उट्ठें
वो
फूल
खिल
के
रहेंगे
जो
खिलने
वाले
हैं
Sahir Ludhianvi
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"उसके
हाथ
में
फूल
है"
मत
कहिए,
कहिए
उसका
हाथ
है
फूल
को
फूल
बनाने
में
Charagh Sharma
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मत
पूछो
कितना
ग़मगीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
ज़्यादा
तुमको
याद
नहीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
अमरोहे
में
बान
नदी
के
पास
जो
लड़का
रहता
था
अब
वो
कहाँ
है
मैं
तो
वहीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
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Jaun Elia
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गुलाब
टहनी
से
टूटा
ज़मीन
पर
न
गिरा
करिश्में
तेज़
हवा
के
समझ
से
बाहर
हैं
Shahryar
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फ़ातिहा
पढ़
कि
फूल
रख
मुझ
पर
आ
गया
है
तो
कुछ
जता
अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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नए
दौर
के
नए
ख़्वाब
हैं
नए
मौसमों
के
गुलाब
हैं
ये
मोहब्बतों
के
चराग़
हैं
इन्हें
नफ़रतों
की
हवा
न
दे
Bashir Badr
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दुनिया
मुझ
सेे
झगड़
के
बैठ
गई
और
मैं
उस
सेे
झगड़
के
बैठ
गया
Sohaib Alvi
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रेशमी
ज़ुल्फ़ों
के
तुम
अपनी
इशारे
समझो
आज
रंगीन
करें
रात
क़रीब
आ
जाओ
Sohaib Alvi
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अपनी
ही
गली
का
इमरान
हाशमी
हूँ
मैं
बात
वो
अलग
हैं
लगना
गले
नहीं
आता
Sohaib Alvi
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परमिशन
चाहता
हूँ
देख
ये
शीशे
से
मैं
बाँधने
लग
गया
हूँ
रस्सी
को
पंखे
से
मैं
Sohaib Alvi
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हमने
तय
है
किया
सिगरेट
से
बीड़ी
का
सफ़र
आप
हमको
न
बताएँ
कि
ग़रीबी
क्या
है
Sohaib Alvi
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