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Sohaib Alvi
ha
ha | हमें जहन्नमी किताबों तक में भी कहा गया
- Sohaib Alvi
हमें
जहन्नमी
किताबों
तक
में
भी
कहा
गया
हमीं
ने
अपने
बाप
पर
भी
हाथ
तक
उठाया
है
- Sohaib Alvi
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उसके
वालिद
नवाब
हैं
भाई
उसको
हक़
है
हमें
भुलाने
का
Deepak Sharma Deep
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गर
ये
अच्छी
क़िस्मत
है
तो
लानत
ऐसी
क़िस्मत
पर
अपने
फोन
में
देख
रहे
हैं,
बाप
को
बूढ़ा
होते
हम
Siddharth Saaz
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क़लम
ही
असला
है
बारूद
है
ग़ज़ल
गोई
सुख़नवरी
में
बराबर
नहीं
बचा
कोई
वो
अपने
बाप
की
दस्तार
की
सगी
इतनी
वो
मेरे
ख़्वाब
में
आई
मगर
नहीं
सोई
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Rishabh Sharma
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और
फिर
एक
दिन
बैठे
बैठे
मुझे
अपनी
दुनिया
बुरी
लग
गई
जिसको
आबाद
करते
हुए
मेरे
मां-बाप
की
ज़िंदगी
लग
गई
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Tehzeeb Hafi
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घर
लौट
के
रोएँगे
माँ
बाप
अकेले
में
मिट्टी
के
खिलौने
भी
सस्ते
न
थे
मेले
में
Qaisar-ul-Jafri
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न
जाने
कौन
सी
दौलत
अता
करता
है
रब
इनको
किसी
भी
बाप
को
मुफ़्लिस
कभी
देखा
नहीं
मैंने
Saheb Shrey
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मुझको
छाँव
में
रखा
और
ख़ुद
भी
वो
जलता
रहा
मैंने
देखा
इक
फ़रिश्ता
बाप
की
परछाईं
में
Unknown
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माँ
बाप
और
उस्ताद
सब
हैं
ख़ुदा
की
रहमत
है
रोक-टोक
उन
की
हक़
में
तुम्हारे
नेमत
Altaf Hussain Hali
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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किस
शफ़क़त
में
गुँधे
हुए
मौला
माँ
बाप
दिए
कैसी
प्यारी
रूहों
को
मेरी
औलाद
किया
Anjum Saleemi
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नहीं
तहज़ीब
बातें
करने
की
औरत
से
ही
साहब
नहीं
तहज़ीब
बातें
करने
की
उस्ताद
से
तुमको
Sohaib Alvi
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बेल
उस
दर
की
बजा
आया
मैं
रह
गया
तकता
दरीचा
मुझको
Sohaib Alvi
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तेरा
लेना
ना
इक
ना
देना
दो
भाई
तू
क्यूँँ
अकड़
के
बैठ
गया
Sohaib Alvi
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दे
नहीं
सकता
फ़ाइदा
मुझको
यार
लगता
है
बे-वफ़ा
मुझको
रस्सी
पंखा
है
मेज
टेबल
है
अपनी
जानिब
को
खींचता
मुझको
होंठों
को
तेरे
चूम
लूँगा
मैं
आँख
भर
के
न
देखना
मुझको
याद
में
उसकी
रातें
कटती
हैं
हिज्र
दीमक
सा
चाटता
मुझको
लड़का
तो
मैं
भी
भोला
भाला
था
हो
गया
है
ये
क्या
से
क्या
मुझको
आप
क्यूँँ
बार
बार
आते
हैं
आने
भी
दीजिए
हवा
मुझको
नील
तक
तो
मुझे
दे
पाया
नहीं
ख़ाक
देगा
तू
रास्ता
मुझको
मीर
ग़ालिब
ही
करता
रहता
है
चल
अली
की
ग़ज़ल
सुना
मुझको
दुनिया
लेती
हैं
मशवरा
मुझ
सेे
आप
देते
हैं
मशवरा
मुझको
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Sohaib Alvi
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परमिशन
चाहता
हूँ
देख
ये
शीशे
से
मैं
बाँधने
लग
गया
हूँ
रस्सी
को
पंखे
से
मैं
Sohaib Alvi
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