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Sohaib Alvi
nahin tahzeeb baatein karne ki aurat se hi sahab
nahin tahzeeb baatein karne ki aurat se hi sahab | नहीं तहज़ीब बातें करने की औरत से ही साहब
- Sohaib Alvi
नहीं
तहज़ीब
बातें
करने
की
औरत
से
ही
साहब
नहीं
तहज़ीब
बातें
करने
की
उस्ताद
से
तुमको
- Sohaib Alvi
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देखा
न
कोहकन
कोई
फ़रहाद
के
बग़ैर
आता
नहीं
है
फ़न
कोई
उस्ताद
के
बग़ैर
Unknown
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अब
न
निकलूँगा
तेरी
बाँहों
से,
अपनी
हद
में
रहा
करूँँगा
मैं
मेरे
सीने
में
है
मेरा
उस्ताद
इसने
जो
भी
कहा
करूँँगा
मैं
Zubair Ali Tabish
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अब
दुआएँ
पा
रहा
है
हर
दिल-ए-नाशाद
की
क्या
ग़ज़ब
होगा
वो
जिसने
ख़ुद-कुशी
ईजाद
की
शा'इरी
का
ये
हुनर
कुछ
देर
से
आया
मगर
जी-हुज़ूरी
की
नहीं
मैंने
किसी
उस्ताद
की
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Rituraj kumar
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माँ
बाप
और
उस्ताद
सब
हैं
ख़ुदा
की
रहमत
है
रोक-टोक
उन
की
हक़
में
तुम्हारे
नेमत
Altaf Hussain Hali
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रेख़्ते
के
तुम्हीं
उस्ताद
नहीं
हो
'ग़ालिब'
कहते
हैं
अगले
ज़माने
में
कोई
'मीर'
भी
था
Mirza Ghalib
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रहबर
भी
ये
हमदम
भी
ये
ग़म-ख़्वार
हमारे
उस्ताद
ये
क़ौमों
के
हैं
में'मार
हमारे
Unknown
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उस्ताद
के
एहसान
का
कर
शुक्र
'मुनीर'
आज
की
अहल-ए-सुख़न
ने
तिरी
ता'रीफ़
बड़ी
बात
Muneer Shikohabadi
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मेरे
संग-ए-मज़ार
पर
फ़रहाद
रख
के
तेशा
कहे
है
या
उस्ताद
Meer Taqi Meer
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मु-ए-जुज़
'मीर'
जो
थे
फ़न
के
उस्ताद
यही
इक
रेख़्ता-गो
अब
रहा
है
Mushafi Ghulam Hamdani
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महरूम
हूँ
मैं
ख़िदमत-ए-उस्ताद
से
'मुनीर'
कलकत्ता
मुझ
को
गोर
से
भी
तंग
हो
गया
Muneer Shikohabadi
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अपनी
ही
गली
का
इमरान
हाशमी
हूँ
मैं
बात
वो
अलग
हैं
लगना
गले
नहीं
आता
Sohaib Alvi
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नील-ओ-नल
अगर
सेना
में
नहीं
भी
होते
तो
'राम'
नाम
के
पत्थर
फिर
भी
तैर
जाने
थे
Sohaib Alvi
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देगा
कब
रास्ता
दरिया
मुझको
मार
डालेगा
ये
सदमा
मुझको
राम
के
देश
से
लाया
था
वो
दे
नहीं
पाया
जो
तोहफ़ा
मुझको
ख़ाक
होगा
ये
तकब्बुर
मेरा
मार
डालेगा
ये
कर्ज़ा
मुझको
बेल
उस
दर
कि
बजा
आया
मैं
रह
गया
तकता
दरीचा
मुझको
आया
हैं
काला
पहन
कर
वो
तो
था
किया
पीले
का
वा'दा
मुझको
गिर
गया
ख़ून
मिरा
हैं
इस
पर
जेल
भेजेगा
ये
असला
मुझको
चेहरा
तक
देखा
नहीं
है
उसका
जिस
कँवल
ने
दिया
कुर्ता
मुझको
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Sohaib Alvi
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तेरा
लेना
ना
इक
ना
देना
दो
भाई
तू
क्यूँँ
अकड़
के
बैठ
गया
Sohaib Alvi
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बात
ये
दिल
की
बतानी
भी
नहीं
आती
है
हम
सेे
तो
बंसी
बजानी
भी
नहीं
आती
है
Sohaib Alvi
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