zindagi bhi bachi kuchh nahin | ज़िंदगी भी बची कुछ नहीं

  - Simar Gozra
ज़िंदगीभीबचीकुछनहीं
औरहुआभीअभीकुछनहीं
सोचूँतोउम्रभीकमहैअब
देखूँतोशा'इरीकुछनहीं
प्यासइकघूँटकीमारहै
पीलूँतोबाल्टीकुछनहीं
हालपेमेरेयूँँहँसतीहै
जैसेवोजानतीकुछनहीं
रोज़इकहुस्नपरमरनाहै
औरतोआशिक़ीकुछनहीं
चीखनेकोमैंभीचीखलूँ
ऐसेतोगायकीकुछनहीं
  - Simar Gozra
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