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Simar Gozra
jiski aankh men bahta dariyaa dekha hai
jiski aankh men bahta dariyaa dekha hai | जिसकी आँख में बहता दरिया देखा है
- Simar Gozra
जिसकी
आँख
में
बहता
दरिया
देखा
है
हमने
उसके
दिल
में
सहरा
देखा
है
झीलें
भी
अब
क्या
ही
गहरी
लगती
हैं
मैंने
उसकी
आँखों
को
क्या
देखा
है
बरसातों
का
डर
है
उनकी
आँखों
में
जिस
जिस
ने
भी
टूटा
दरिया
देखा
है
- Simar Gozra
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उसको
कहना
कि
मुहब्बत
न
करे
गर
करे
तो
वो
शिकायत
न
करे
वस्ल
उस
शख़्स
से
हो
मेरा
जो
मरने
के
बाद
भी
हिजरत
न
करे
उसके
ही
शहर
के
शाइर
थे
सब
उसकी
फिर
कैसे
रिवायत
न
करे
ऐब
जब
उसके
गिनाने
मैं
लगूँ
फिर
कोई
उसकी
हिमायत
न
करे
टूटे
हैं
सारे
त'अल्लुक़
तो
अब
यार
वो
हम
से
अदावत
न
करे
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Simar Gozra
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रख
लिया
जाए
या
फ़ना
किया
जाए
इस
तबीयत
का
बोलो
क्या
किया
जाए
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जैसे
ख़ुद
ही
पेड़
गिरा
हो
आरे
पर
हम
सेे
क़ाबू
हुआ
न
अपने
ग़ुस्से
पर
मैं
हूँ
जो
हूँ
ख़ाली
पड़ा
हूँ
कमरे
में
बर्तन
हैं
जो
ख़ाली
पड़े
हैं
चूल्हे
पर
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Simar Gozra
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उसके
शहर
के
लड़के
होंगे
मरते
होंगे
वो
जो
उस
पे
मरते
होंगे
मरते
होंगे
ख़ल्वत
कैसे
ज़िंदगी
को
खा
जाती
है
दोस्त
इश्क़
से
जो
भी
डरते
होंगे
मरते
होंगे
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Simar Gozra
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उसकी
इक
तस्वीर
पड़ी
है
बटुए
में
जिसको
देख
के
मेरा
गुज़ारा
होता
है
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