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Simar Gozra
sochta hooñ teraa kya lagta hooñ
sochta hooñ teraa kya lagta hooñ | सोचता हूँ तेरा क्या लगता हूँ
- Simar Gozra
सोचता
हूँ
तेरा
क्या
लगता
हूँ
दर्द
या
फिर
मैं
दवा
लगता
हूँ
उसने
पूछा
तो
बता
देता
ना
रिश्ते
में
मैं
तेरा
क्या
लगता
हूँ
सारी
दुनिया
है
परेशाँ
मुझ
सेे
क्या
मैं
तुझको
भी
बुरा
लगता
हूँ
अब
तो
आँखें
भी
न
ख़ुद
से
मिलती
मैं
तो
ख़ुद
से
भी
ख़फ़ा
लगता
हूँ
क्यूँ
दिखाते
हो
ये
शीशा
मुझको
मुँह
पे
बोलो
मैं
बुरा
लगता
हूँ
मेरी
ख़ल्वत
भी
ख़ला
है
जो
अब
मैं
तो
ख़ुद
से
भी
जुदा
लगता
हूँ
- Simar Gozra
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इश्क़
मुहब्बत
प्यार
जो
कहता
धोखा
है
उस
बंदे
को
सब
से
ज़्यादा
धोखा
है
धोखा
खा
के
अक्ल
आई
तो
समझा
मैं
सब
सेे
ज़्यादा
काम
का
नुस्खा
धोखा
है
प्यार
में
हो
व्यापार
में
हो
या
जंग
में
हो
ज़्यादा
हो
या
कम
हो
धोखा
धोखा
है
आज
भी
मुझको
पहले
जैसा
चाहती
है
आज
भी
मुझको
पहले
जैसा
धोखा
है
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Simar Gozra
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इस
तरह
वो
न
जलाएँ
हमको
है
मुहब्बत
तो
बताएँ
हमको
बद-दुआओं
ने
बचाया
वरना
ले
ही
डूबी
थी
दुआएँ
हमको
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Simar Gozra
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जब
मस्तक
पर
ही
लिख
दी
थी
अँधेरे
की
लौ
तो
फिर
हम
क्या
उसका
सुहाग
रौशन
करते
Simar Gozra
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वही
तो
दिन
था
जब
था
छोड़ा
उसने
फिर
मनाया
तब
से
मैंने
जन्मदिन
नहीं
Simar Gozra
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लोग
तो
इसको
धोखा
जुदाई
दर्द
फ़िराक़त
मानते
हैं
बस
हम
शाइर
ही
है
मुहब्बत
को
जो
मुहब्बत
मानते
हैं
Simar Gozra
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