dil-o-zehan men mere ghar kar ga.e tum | दिल-ओ-ज़हन में मेरे घर कर गए तुम

  - Shubham Mishra
दिल-ओ-ज़हनमेंमेरेघरकरगएतुम
असरदारथे,बेअसरकरगएतुम
सजाकररखेथेजोएहसासअपने
अचानकइधरसेउधरकरगएतुम
अकेलेसुकूँसेचलेजारहेथे
मुसीबतभरायेसफ़रकरगएतुम
किताब-ए-मुहब्बतभीछपतीहमारी
कहानीमगरमुख़्तसरकरगएतुम
येआँखेंझुकीसींयेचेहराबुझासा
दग़ाजानमुझसेेकिधरकरगएतुम
  - Shubham Mishra
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