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Shubham Dwivedi
lafz saare dhare ke dhare hi rahe
lafz saare dhare ke dhare hi rahe | लफ़्ज़ सारे धरे के धरे ही रहे
- Shubham Dwivedi
लफ़्ज़
सारे
धरे
के
धरे
ही
रहे
वो
खड़े
थे
खड़े
के
खड़े
ही
रहे
उनके
मरहम
में
वो
बात
थी
ही
नहीं
ज़ख़्म
मेरे
हरे
के
हरे
ही
रहे
चैन
की
साँस
लेने
की
फ़ुर्सत
न
थी
आशिक़ी
में
मेरे
हादसे
ही
रहे
मैंने
सोचा
था
है
इल्म
थोड़ा
मगर
शा'इरी
में
मेरे
मस'अले
ही
रहे
लोग
आते
रहे
फूल
चुनते
रहे
ऐ
'शुभम'
तुम
भले
के
भले
ही
रहे
- Shubham Dwivedi
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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इक
लफ़्ज़-ए-मोहब्बत
का
अदना
ये
फ़साना
है
सिमटे
तो
दिल-ए-आशिक़
फैले
तो
ज़माना
है
Jigar Moradabadi
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आप
अपने
से
हम-सुख़न
रहना
हमनशीं
साँस
फूल
जाती
है
Jaun Elia
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एक
रिश्ता
जिसे
मैं
दे
न
सका
कोई
नाम
एक
रिश्ता
जिसे
ता-उम्र
निभाए
रक्खा
Aks samastipuri
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इतनी
मिलती
है
मिरी
ग़ज़लों
से
सूरत
तेरी
लोग
तुझ
को
मिरा
महबूब
समझते
होंगे
Bashir Badr
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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मैं
अपने
बाप
के
सीने
से
फूल
चुनता
हूँ
सो
जब
भी
साँस
थमी
बाग़
में
टहल
आया
Hammad Niyazi
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ख़ुद-कुशी
ही
थी,पर
ऐसा
जाल
में
फांसा
मुझे
मर
गया
वो
शख़्स,मेरे
हाथ
ख़ंजर
रह
गया
मिलने
की
उम्मीद
से,उस
लाश
के
ताबूत
में
जिस्म
लेटा
था,पर
उसका
हाथ
बाहर
रह
गया
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Shubham Dwivedi
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बिन
बादल
बरसात
आई
है,आने
दो,
उसके
घर
बारात
आई
है,
आने
दो
Shubham Dwivedi
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मन
है
चंचल
ये
डाली
बदलता
रहा
बन
के
मर्कट
उछल
के
ये
छलता
रहा
हम
समझते
तो
हैं
इसकी
हर
चाल
को
मन
तो
मन
है
ये
फिर
भी
मचलता
रहा
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Shubham Dwivedi
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हम
सफ़र
में
थे
पर,हम
सेफ़र
के
बिना,
वो
सफ़र
फिर
हमें
रास
आया
नहीं
Shubham Dwivedi
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मुसलसल
ख़्वाब
में
आती
रही
वो
हक़ीकत
में
जिसे
दिल
चाहता
है
Shubham Dwivedi
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