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Shubham Dwivedi
man hai chanchal ye daali badalta raha
man hai chanchal ye daali badalta raha | मन है चंचल ये डाली बदलता रहा
- Shubham Dwivedi
मन
है
चंचल
ये
डाली
बदलता
रहा
बन
के
मर्कट
उछल
के
ये
छलता
रहा
हम
समझते
तो
हैं
इसकी
हर
चाल
को
मन
तो
मन
है
ये
फिर
भी
मचलता
रहा
- Shubham Dwivedi
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तू
भी
सादा
है
कभी
चाल
बदलता
ही
नहीं
हम
भी
सादा
हैं
इसी
चाल
में
आ
जाते
हैं
Afzal Khan
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तू
मोहब्बत
से
कोई
चाल
तो
चल
हार
जाने
का
हौसला
है
मुझे
Ahmad Faraz
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अपनी
हस्ती
का
भी
इंसान
को
इरफ़ांन
हुआ
ख़ाक
फिर
ख़ाक
थी
औक़ात
से
आगे
न
बढ़ी
Shakeel Badayuni
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नाराज़गी
का
मेरी
ये
आलम
है
इन
दिनों
है
बंद
अपने
आप
से
भी
बोल-चाल
यार
Rajesh Reddy
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बहुत
सी
हैं
जगह
रहने
कि
यूँँ
तो
मगर
औक़ात
का
अपना
मज़ा
है
Talib Toofani
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साल
के
तीन
सौ
पैंसठ
दिन
में
एक
भी
रात
नहीं
है
उसकी
वो
मुझे
छोड़
दे
और
ख़ुश
भी
रहे
इतनी
औक़ात
नहीं
है
उसकी
Muzdum Khan
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तसव्वुर
तजरबा
तेवर
तमन्ना
और
तन्हाई
मिलेंगे
फूल
सब
इस
में
ग़ज़ल
गुलदान
है
यारों
पढ़ाई
नौकरी
शादी
फिर
उसके
बाद
दो
बच्चे
हमारी
ज़िन्दगी
इतनी
कहाँ
आसान
है
यारों
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Tanoj Dadhich
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पहले
ख़याल
रख
मिरा
मेहमान
कर
मुझे
फिर
अपनी
कोई
चाल
से
हैरान
कर
मुझे
हैं
कौन
आप,
याद
नहीं,कब
मिले
थे
हम
इतना
भी
ख़ुश
न
होइए
पहचान
कर
मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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पहले
तो
तुम्हें
जान
पुकारेंगे
यही
लोग
फिर
ख़ुद
ही
तुम्हें
जान
से
मारेंगे
यही
लोग
मुँह
पर
तो
बड़े
फ़ख्र
से
ता'ईद
करेंगे
फिर
पीठ
में
खंज़र
भी
उतारेंगे
यही
लोग
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Ashraf Ali
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हर
एक
लफ़्ज़
के
तेवर
ही
और
होते
हैं
तेरे
नगर
के
सुख़न-वर
ही
और
होते
हैं
तुम्हारी
आँखों
में
वो
बात
ही
नहीं
ऐ
दोस्त
डुबोने
वाले
समुंदर
ही
और
होते
हैं
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Abrar Kashif
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हम
सफ़र
में
थे
पर,हम
सेफ़र
के
बिना,
वो
सफ़र
फिर
हमें
रास
आया
नहीं
Shubham Dwivedi
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कभी
हँसता
हूँ
तो
आँखें
कभी
मैं
नम
भी
रखता
हूँ
हर
इक
मुस्कान
के
पीछे
हज़ारों
ग़म
भी
रखता
हूँ
शिफ़ा
भी
दे
नहीं
सकता
मुझे
कोई
मेरा
अपना
नतीजन
मैं
मिरे
ज़ख़्मों
का
ख़ुद
मरहम
भी
रखता
हूँ
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Shubham Dwivedi
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बिन
बादल
बरसात
आई
है,आने
दो,
उसके
घर
बारात
आई
है,
आने
दो
Shubham Dwivedi
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बिन
बादल
बरसात
आई
है,आने
दो,
उसके
घर
बारात
आई
है,
आने
दो
Shubham Dwivedi
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मुसलसल
ख़्वाब
में
आती
रही
वो
हक़ीकत
में
जिसे
दिल
चाहता
है
Shubham Dwivedi
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