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Shiv
sabhi patthar tere haathon se lag kar ke
sabhi patthar tere haathon se lag kar ke | सभी पत्थर तेरे हाथों से लग कर के
- Shiv
सभी
पत्थर
तेरे
हाथों
से
लग
कर
के
मेरी
जाँ
फूल
में
तब्दील
होते
हैं
- Shiv
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वो
सिर्फ़
फूल
नहीं
ख़ुद
में
ही
क्यारी
था
हमारा
शे'र
तुम्हारी
ग़ज़ल
पे
भारी
था
सब
उसके
चाहने
वाले
सलाम
करते
थे
मैं
उस
हसीन
का
सब
सेे
बड़ा
पुजारी
था
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Vishnu virat
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पैर
के
छालों
में
चुभते
हैं
हजारों
काँटें
फूल
तब
बाग
में
शायान
हुआ
करते
हैं
Aves Sayyad
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साँवले
तन
पे
ग़ज़ब
धज
है
बसंती
शाल
की
जी
में
है
कह
बैठिए
अब
जय
कनहय्या
लाल
की
Insha Allah Khan
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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गया
था
माँगने
ख़ुशबू
मैं
फूल
से
लेकिन
फटे
लिबास
में
वो
भी
गदा
लगा
मुझ
को
Aanis Moin
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आप
अपने
से
हम-सुख़न
रहना
हमनशीं
साँस
फूल
जाती
है
Jaun Elia
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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जिन
से
उठता
नहीं
कली
का
बोझ
उन
के
कंधों
पे
ज़िन्दगी
का
बोझ
वक़्त
जब
हाथ
में
नहीं
रहता
किस
लिए
हाथ
पर
घड़ी
का
बोझ
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Vikram Sharma
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तुमने
जो
फूल
लेते
में
छू
लीं
हैं
उंगलियाँ
मेरे
बदन
से
आएगी
ख़ुशबू
गुलाब
की
Siddharth Saaz
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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बेजान
चीजें
नाज़नीं
से
दूर
रख
मुतलक़
सभी
में
जाँ
बसा
के
क्या
मिला
Shiv
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आपके
ही
साथ
आए
थे
यहाँ
तक
आपने
ही
दिल
दुखाया
है
हमारा
Shiv
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यक़ीनन
तुझे
खोने
वाले
सभी
फ़िक्र
से
मर
रहे
हैं
Shiv
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बर्तन
उदासी
के
सभी
जब
भर
गए
सब
चाहने
वाले
तेरे
फिर
घर
गए
ज़िंदान
से
कोई
बचा
था
ही
नहीं
कुछ
तौक़
से
बंधे
थे
जिनके
सर
गए
उसको
गले
से
ही
लगा
कर
हम
बचे
दिल
से
उसे
जो
भी
लगाए
मर
गए
उम्मीद
उन
सेे
थी
हमें
इस
बात
की
उनको
कभी
जाना
नहीं
था
पर
गए
वो
लोग
शेर-ओ-शाइरी
से
दूर
थे
बे-बहर
को
भी
जो
ग़ज़ल
कह
कर
गए
काँटा
बना
कर
वो
गई
है
फूल
को
'शिव'
चुभ
न
जाए
तोड़ने
तुम
गर
गए
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Shiv
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इक
जलपरी
को
जाल
फेंके
थे
सभी
फँसते
गए
हम
सब
मियाँ
उस
जाल
में
Shiv
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