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Shiv
ik jalpari ko jaal fenke the sabhi
ik jalpari ko jaal fenke the sabhi | इक जलपरी को जाल फेंके थे सभी
- Shiv
इक
जलपरी
को
जाल
फेंके
थे
सभी
फँसते
गए
हम
सब
मियाँ
उस
जाल
में
- Shiv
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तू
उसके
दिल
में
जगह
चाहता
है
यार
जो
शख़्स
किसी
को
देता
नहीं
अपने
साथ
वाली
जगह
Umair Najmi
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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इश्क़
के
रंग
में
ऐ
मेरे
यार
रंग
आया
फिर
आज
रंगों
का
तेहवार
रंग
हो
गुलाबी
या
हो
लाल
पीला
हरा
आ
लगा
दूँ
तुझे
भी
मैं
दो
चार
रंग
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Afzal Ali Afzal
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यार
इक
बार
परिंदों
को
हुकूमत
दे
दो
ये
किसी
शहर
को
मक़्तल
नहीं
होने
देंगे
ये
जो
चेहरे
हैं
यहाँ
चाँद
से
चेहरे
'ताबिश'
ये
मिरा
इश्क़
मुकम्मल
नहीं
होने
देंगे
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Abbas Tabish
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कुछ
तो
कर
आदाब-ए-महफ़िल
का
लिहाज़
यार
ये
पहलू
बदलना
छोड़
दे
Waseem Barelvi
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हम
से
कोई
तअल्लुक़-ए-ख़ातिर
तो
है
उसे
वो
यार
बा-वफ़ा
न
सही
बे-वफ़ा
तो
है
Jameel Malik
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अपनी
बाँहो
से
क्यूँँ
हटाऊँ
उसे
सो
रहा
है
तो
क्यूँँ
जगाऊँ
उसे
जो
भी
मिलता
है
उसका
पूछता
है
यार
किस
किस
से
मैं
छुपाऊँ
उसे
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Kafeel Rana
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यार
भी
राह
की
दीवार
समझते
हैं
मुझे
मैं
समझता
था
मेरे
यार
समझते
हैं
मुझे
Shahid Zaki
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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तन्हाई
ये
तंज
करे
है
तन्हा
क्यूँ
है
यार
कहाँ
है
आगे
पीछे
चलने
वाले
Vishal Singh Tabish
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यार
देखो
और
हाथों
को
हिलाओ
हैफ़
कोई
रह
रहा
है
बादलों
में
Shiv
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दरियादिली
देखें
तिरी
हँसते
सभी
मारे
गए
Shiv
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सड़
गया
रक्खा
हुआ
पानी
भी
ख़ुद
ही
कब
तलक़
हम
आप
को
यूँँ
साथ
रखते
Shiv
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कुछ
नहीं
कहता
है
अब
वो
होंठ
पर
जो
होंठ
रख
देता
था
मेरी
बात
सुन
कर
Shiv
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फिर
से
वही
जो
कुछ
रवानी
चाहिए
क्या
बात
है
की
शब
जलानी
चाहिए
लग
कर
गिरे
है
उसके
होंठों
से
सुनो
मुझको
वही
सो
रग
पुरानी
चाहिए
कोई
नई
बातें
नहीं
अब
यार
वो
इक
जिस्म
को
फिर
से
जवानी
चाहिए
मैं
जो
किसी
से
कह
नहीं
पा'ता
अदू
क्या
अब
दिवारों
से
छुपा'नी
चाहिए
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Shiv
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