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Shiv
kuchh nahin kahtaa hai ab vo hont par jo
kuchh nahin kahtaa hai ab vo hont par jo | कुछ नहीं कहता है अब वो होंठ पर जो
- Shiv
कुछ
नहीं
कहता
है
अब
वो
होंठ
पर
जो
होंठ
रख
देता
था
मेरी
बात
सुन
कर
- Shiv
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मुँह
लगाते
ही
होंठ
पर
तेरे
पड़
गया
नक़्श
लाल
बोसे
का
Insha Allah Khan
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कुछ
इस
सलीक़े
से
माथे
पे
उसने
होंट
रखे
बदन
को
छोड़
के
सारी
थकन
को
चूम
लिया
Harsh saxena
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न
उन
लबों
पे
तबस्सुम
न
फूल
शाख़ों
पर
गुज़र
गए
हैं
जो
मौसम
गुज़रने
वाले
थे
Kaif Uddin Khan
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कभी
हँसता
हूँ
तो
आँखें
कभी
मैं
नम
भी
रखता
हूँ
हर
इक
मुस्कान
के
पीछे
हज़ारों
ग़म
भी
रखता
हूँ
शिफ़ा
भी
दे
नहीं
सकता
मुझे
कोई
मेरा
अपना
नतीजन
मैं
मिरे
ज़ख़्मों
का
ख़ुद
मरहम
भी
रखता
हूँ
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Shubham Dwivedi
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होंटों
पर
इक
बार
सजा
कर
अपने
होंट
उस
के
बाद
न
बातें
करना
सो
जाना
Ateeq Allahabadi
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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छुआ
था
होंठ
से
बस
होंठ
को
ही
गुलाबी
हो
गया
क्यूँ
जिस्म
सारा
Ashish Awasthi
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बोसे
में
होंट
उल्टा
'आशिक़
का
काट
खाया
तेरा
दहन
मज़े
सीं
पुर
है
पे
है
कटोरा
Abroo Shah Mubarak
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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तूने
देखी
है
वो
पेशानी
वो
रुख़्सार
वो
होंठ
ज़िंदगी
जिनके
तसव्वुर
में
लुटा
दी
हमने
तुझपे
उठी
हैं
वो
खोई
हुई
साहिर
आँखें
तुझको
मालूम
है
क्यूँ
उम्र
गंवा
दी
हमने
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Faiz Ahmad Faiz
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एक
दिन
मैंने
लकीरों
को
बदल
देना
है
जानाँ
ये
लकीरें
साथ
मेरा
देती
दिखती
न
कहीं
से
Shiv
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मैं
त'अर्रूफ़
कर
रहा
हूँ
उसके
आईने
से
अब
छोड़
कर
अफ़सोस
क्या
वो
कर
रहा
होगा
मुझे
Shiv
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इक
दुख
रहेगा
ज़िन्दगी
भर
का
हमें
हिस्से
हमारे
तू
नहीं
आया
कभी
Shiv
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बेजान
चीजें
नाज़नीं
से
दूर
रख
मुतलक़
सभी
में
जाँ
बसा
के
क्या
मिला
Shiv
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सड़
गया
रक्खा
हुआ
पानी
भी
ख़ुद
ही
कब
तलक़
हम
आप
को
यूँँ
साथ
रखते
Shiv
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