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Shiv
be
be | बेजान चीजें नाज़नीं से दूर रख
- Shiv
बेजान
चीजें
नाज़नीं
से
दूर
रख
मुतलक़
सभी
में
जाँ
बसा
के
क्या
मिला
- Shiv
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जान-लेवा
थीं
ख़्वाहिशें
वर्ना
वस्ल
से
इंतिज़ार
अच्छा
था
Jaun Elia
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ज़ब्त
का
ऐसे
इम्तिहान
न
ले
ऐ
मेरी
जान
मेरी
जान
न
ले
Khalid Sajjad
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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राहों
में
जान
घर
में
चराग़ों
से
शान
है
दीपावली
से
आज
ज़मीन
आसमान
है
Obaid Azam Azmi
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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पहले
तो
तुम्हें
जान
पुकारेंगे
यही
लोग
फिर
ख़ुद
ही
तुम्हें
जान
से
मारेंगे
यही
लोग
मुँह
पर
तो
बड़े
फ़ख्र
से
ता'ईद
करेंगे
फिर
पीठ
में
खंज़र
भी
उतारेंगे
यही
लोग
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Ashraf Ali
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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जब
तलक
अनजान
थे
मेहफ़ूज़
थे
जान
लेना
जानलेवा
हो
गया
Vishal Bagh
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अपने
होटों
की
ये
तहरीर
रखो
अपने
पास
हम
वो
'आशिक़
हैं
जो
आँखों
को
पढ़ा
करते
हैं
Meem Alif Shaz
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न
लेंगे
दर्द
ना
ही
हम
दवा
लेंगे
तिरे
हाथों
ख़सारा
सो
नवा
लेंगे
नहीं
था
दूसरा
कोई
तिरे
जैसा
बनाएँगे
नकल
फिर
नारवा
लेंगे
ये
दिल
टूटा
कई
सौ
बार
तुम
ही
से
मिले
गर
ज़ख़्म
पर
दम
वो
हवा
लेंगे
सदाएँ
जो
हमारी
बस
दु'आ
में
थीं
तलब
थी
बददुआ
की
ख़ुशनवा
लेंगे
कई
लाशें
मिली
तुम
जब
गए
तब
से
सभी
यह
कह
रहे
वो
घर
नवा
लेंगे
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Shiv
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सभी
से
सिर्फ़
हम
लानत
की
ख़ातिर
ही
हज़ारों
बार
उस
पर
शे'र
कहते
हैं
Shiv
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फिर
से
वही
जो
कुछ
रवानी
चाहिए
क्या
बात
है
की
शब
जलानी
चाहिए
लग
कर
गिरे
है
उसके
होंठों
से
सुनो
मुझको
वही
सो
रग
पुरानी
चाहिए
कोई
नई
बातें
नहीं
अब
यार
वो
इक
जिस्म
को
फिर
से
जवानी
चाहिए
मैं
जो
किसी
से
कह
नहीं
पा'ता
अदू
क्या
अब
दिवारों
से
छुपा'नी
चाहिए
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Shiv
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तेरे
दुख
में
मिले
हैं
हम
तुझे
दुख
से
बचाएंगे
Shiv
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बचपन
नहीं
देखा
ख़ुदा
बच्चों
ने
जो
किरदार
तुमने
ही
बड़ों
वाले
दिए
Shiv
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