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Shiv
izhaar tak usko na kar paa.e kabhi
izhaar tak usko na kar paa.e kabhi | इज़हार तक उसको न कर पाए कभी
- Shiv
इज़हार
तक
उसको
न
कर
पाए
कभी
क्या
आशिक़ी
करते
रहे
हम
लोग
ये
- Shiv
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मैं
ने
पूछा
था
कि
इज़हार
नहीं
हो
सकता
दिल
पुकारा
कि
ख़बर-दार
नहीं
हो
सकता
Abbas Tabish
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इज़हार
पे
भारी
है
ख़मोशी
का
तकल्लुम
हर्फ़ों
की
ज़बाँ
और
है
आँखों
की
ज़बाँ
और
Haneef akhgar
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हम
सेे
फिर
प्यार
का
इज़हार
किया
है
तुमने
ये
तमाशा
तो
कई
बार
किया
है
तुमने
Anjum Rehbar
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कीजे
इज़हार-ए-मोहब्बत
चाहे
जो
अंजाम
हो
ज़िंदगी
में
ज़िंदगी
जैसा
कोई
तो
काम
हो
Priyamvada ilhan
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उसको
चाहा
और
चाहत
पर
क़ायम
हैं
पर
अफ़सोस
के
हम
इज़हार
नहीं
कर
सकते
Shadab Asghar
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बैठा
हूँ
अभी
सामने
और
सोच
रहा
हूँ
इज़हार
पे
मेरे
भला
क्या
मेरा
बनेगा
Afzal Ali Afzal
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अगर
है
इश्क़
सच्चा
तो
निगाहों
से
बयाँ
होगा
ज़बाँ
से
बोलना
भी
क्या
कोई
इज़हार
होता
है
Bhaskar Shukla
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अपने
इश्क़
का
यूँँ
इज़हार
करना
है
तुझ
सेे
तुझको
हाथों
से
पहनाएँगें
कानों
में
झुमके
Harsh saxena
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हाए!
इज़हार
करके
पछताए
उसको
इक
दोस्त
की
ज़रूरत
थी
Kumar Vikas
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दिल
की
बातें
दूसरों
से
मत
कहो
लुट
जाओगे
आज
कल
इज़हार
के
धंधे
में
है
घाटा
बहुत
Shuja Khawar
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बर्तन
उदासी
के
सभी
जब
भर
गए
सब
चाहने
वाले
तेरे
फिर
घर
गए
ज़िंदान
से
कोई
बचा
था
ही
नहीं
कुछ
तौक़
से
बंधे
थे
जिनके
सर
गए
उसको
गले
से
ही
लगा
कर
हम
बचे
दिल
से
उसे
जो
भी
लगाए
मर
गए
उम्मीद
उन
सेे
थी
हमें
इस
बात
की
उनको
कभी
जाना
नहीं
था
पर
गए
वो
लोग
शेर-ओ-शाइरी
से
दूर
थे
बे-बहर
को
भी
जो
ग़ज़ल
कह
कर
गए
काँटा
बना
कर
वो
गई
है
फूल
को
'शिव'
चुभ
न
जाए
तोड़ने
तुम
गर
गए
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Shiv
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मेरा
उस
शख़्स
पे
मरना
तो
लाज़िम
है
मिरा
जीने
को
भी
अब
जी
नहीं
करता
Shiv
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उसको
गले
से
ही
लगा
कर
हम
बचे
दिल
से
उसे
जो
भी
लगाए
मर
गए
Shiv
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उम्मीद
उन
सेे
थी
हमें
इस
बात
की
उनको
कभी
जाना
नहीं
था
पर
गए
Shiv
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न
लेंगे
दर्द
ना
ही
हम
दवा
लेंगे
तिरे
हाथों
ख़सारा
सो
नवा
लेंगे
नहीं
था
दूसरा
कोई
तिरे
जैसा
बनाएँगे
नकल
फिर
नारवा
लेंगे
ये
दिल
टूटा
कई
सौ
बार
तुम
ही
से
मिले
गर
ज़ख़्म
पर
दम
वो
हवा
लेंगे
सदाएँ
जो
हमारी
बस
दु'आ
में
थीं
तलब
थी
बददुआ
की
ख़ुशनवा
लेंगे
कई
लाशें
मिली
तुम
जब
गए
तब
से
सभी
यह
कह
रहे
वो
घर
नवा
लेंगे
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Shiv
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