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Shiv
ummeed unse thii ha
ummeed unse thii ha | उम्मीद उन सेे थी हमें इस बात की
- Shiv
उम्मीद
उन
सेे
थी
हमें
इस
बात
की
उनको
कभी
जाना
नहीं
था
पर
गए
- Shiv
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शाख़-ए-उम्मीद
से
कड़वा
भी
उतर
सकता
हूँ
रोज़
ये
बात
मुझे
सब्र
का
फल
कहता
है
Rakib Mukhtar
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सभी
के
दीप
सुंदर
हैं
हमारे
क्या
तुम्हारे
क्या
उजाला
हर
तरफ़
है
इस
किनारे
उस
किनारे
क्या
Hafeez Banarasi
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चलो
माना
कि
रोना
मसअले
का
हल
नहीं
लेकिन
करे
भी
क्या
कोई
जब
ख़त्म
हर
उम्मीद
हो
जाए
Bhaskar Shukla
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उठते
नहीं
हैं
अब
तो
दु'आ
के
लिए
भी
हाथ
किस
दर्जा
ना-उमीद
हैं
परवरदिगार
से
Akhtar Shirani
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न
कोई
वा'दा
न
कोई
यक़ीं
न
कोई
उमीद
मगर
हमें
तो
तिरा
इंतिज़ार
करना
था
Firaq Gorakhpuri
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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कोशिश
भी
कर
उमीद
भी
रख
रास्ता
भी
चुन
फिर
इस
के
ब'अद
थोड़ा
मुक़द्दर
तलाश
कर
Nida Fazli
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हम
हैं
रहे-उम्मीद
से
बिल्कुल
परे
परे
अब
इंतज़ार
आपका
कोई
करे!
करे!
मैंने
तो
यूँँ
ही
अपनी
तबीयत
सुनाई
थी
तुम
तो
लगीं
सफाइयाँ
देने,
अरे!
अरे!
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Balmohan Pandey
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हासिल
न
कर
पाया
तुझे
मैं
मिन्नतों
के
बाद
भी
उम्मीद
सेंटा
से
लगाना
लाज़मी
भी
है
मिरा
Harsh saxena
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मैं
हर
शख़्स
के
चेहरे
को
बस
इस
उम्मीद
से
तकता
हूँ
शायद
से
मुझको
दो
आँखें
तेरे
जैसी
दिख
जाएँ
Siddharth Saaz
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फिर
से
वही
जो
कुछ
रवानी
चाहिए
क्या
बात
है
की
शब
जलानी
चाहिए
लग
कर
गिरे
है
उसके
होंठों
से
सुनो
मुझको
वही
सो
रग
पुरानी
चाहिए
कोई
नई
बातें
नहीं
अब
यार
वो
इक
जिस्म
को
फिर
से
जवानी
चाहिए
मैं
जो
किसी
से
कह
नहीं
पा'ता
अदू
क्या
अब
दिवारों
से
छुपा'नी
चाहिए
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Shiv
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वो
नहीं
लौटा
यक़ीनन
मारे
जाएँगे
सभी
पेड़,
पौधे,
सब
यहाँ
के
इंतिज़ारी
में
है
रब
Shiv
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ये
ग़ज़ल
ये
शे'र
औ'
उस
शख़्स
की
याद
हम
उसे
ख़ुद
से
अलग
रख
ही
न
पाए
Shiv
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रहेंगे
चुप
तिरे
हक़
में
सभी
नादाँ
हमारे
हक़
दिलों
दीवार
रोएँगे
Shiv
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निकल
के
उसकी
आँखों
से
करेंगे
क्या
सभी
दरिया
की
आँखों
से
बहेंगे
हम
Shiv
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