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Shiv
ek tak jo dekhte pankhe ko ham
ek tak jo dekhte pankhe ko ham | एक टक जो देखते पंखे को हम
- Shiv
एक
टक
जो
देखते
पंखे
को
हम
ख़ुद-कुशी
लाज़िम
है
हमको
रोक
लें
- Shiv
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मैं
अपनी
मौत
से
ख़ल्वत
में
मिलना
चाहता
हूँ
सो
मेरी
नाव
में
बस
मैं
हूँ
नाख़ुदा
नहीं
है
Pallav Mishra
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मिरी
ज़िंदगी
तो
गुज़री
तिरे
हिज्र
के
सहारे
मिरी
मौत
को
भी
प्यारे
कोई
चाहिए
बहाना
Jigar Moradabadi
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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इश्क़
में
ख़ुद-कुशी
नहीं
करते
इश्क़
में
इंतिज़ार
करते
हैं
Rajesh Reddy
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मौत
ने
सारी
रात
हमारी
नब्ज़
टटोली
ऐसा
मरने
का
माहौल
बनाया
हमने
घर
से
निकले
चौक
गए
फिर
पार्क
में
बैठे
तन्हाई
को
जगह-जगह
बिखराया
हमने
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Shariq Kaifi
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हम
चाहते
थे
मौत
ही
हम
को
जुदा
करे
अफ़्सोस
अपना
साथ
वहाँ
तक
नहीं
हुआ
Waseem Nadir
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जब
से
छेड़ा
है
मेरे
ज़ख़्मों
को
आ
रही
मौत
की
सदा
मुझको
Rachit Sonkar
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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देखो
मौत
का
मौसम
आने
वाला
है
ज़िंदा
रहना
सब
सेे
बड़ी
लड़ाई
है
Shadab Asghar
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दिल
को
सुकून
रूह
को
आराम
आ
गया
मौत
आ
गई
कि
दोस्त
का
पैग़ाम
आ
गया
Jigar Moradabadi
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उसको
गले
से
ही
लगा
कर
हम
बचे
दिल
से
उसे
जो
भी
लगाए
मर
गए
Shiv
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सभी
से
सिर्फ़
हम
लानत
की
ख़ातिर
ही
हज़ारों
बार
उस
पर
शे'र
कहते
हैं
Shiv
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एक
दिन
मैंने
लकीरों
को
बदल
देना
है
जानाँ
ये
लकीरें
साथ
मेरा
देती
दिखती
न
कहीं
से
Shiv
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उसके
दिए
ज़ख़्मों
का
मरहम
है
अगर
तो
कातिबे-तक़दीर
के
हाथों
में
है
Shiv
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फिर
से
वही
जो
कुछ
रवानी
चाहिए
क्या
बात
है
की
शब
जलानी
चाहिए
लग
कर
गिरे
है
उसके
होंठों
से
सुनो
मुझको
वही
सो
रग
पुरानी
चाहिए
कोई
नई
बातें
नहीं
अब
यार
वो
इक
जिस्म
को
फिर
से
जवानी
चाहिए
मैं
जो
किसी
से
कह
नहीं
पा'ता
अदू
क्या
अब
दिवारों
से
छुपा'नी
चाहिए
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Shiv
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