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Shiv
uske diye zaKHmon ka marham hai agar
uske diye zaKHmon ka marham hai agar | उसके दिए ज़ख़्मों का मरहम है अगर
- Shiv
उसके
दिए
ज़ख़्मों
का
मरहम
है
अगर
तो
कातिबे-तक़दीर
के
हाथों
में
है
- Shiv
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निकल
के
उसकी
आँखों
से
करेंगे
क्या
सभी
दरिया
की
आँखों
से
बहेंगे
हम
Shiv
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हम
ज़माने
याद
करके
रो
रहे
थे
उसके
शाने
याद
करके
रो
रहे
थे
चुप
कराने
कोई
आएगा
हमें
अब
इस
बहाने
याद
करके
रो
रहे
थे
भूल
बैठे
थे
अगर
सब
यार
को
तो
दिन
पुराने
याद
करके
रो
रहे
थे
मर
गए
भूखे
सभी
कुल्फ़त
में
बच्चे
बाप
दाने
याद
करके
रो
रहे
थे
दोष
है
'शिव'
इस
कदर
रोते
नहीं
हैं
सो
सिराने
याद
करके
रो
रहे
थे
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Shiv
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उसको
गले
से
ही
लगा
कर
हम
बचे
दिल
से
उसे
जो
भी
लगाए
मर
गए
Shiv
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इस
फ़रवरी
भले
न
मिल
पाए
आगे
की
फ़रवरी
मिलेंगे
हम
Shiv
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बर्तन
उदासी
के
सभी
जब
भर
गए
सब
चाहने
वाले
तेरे
फिर
घर
गए
ज़िंदान
से
कोई
बचा
था
ही
नहीं
कुछ
तौक़
से
बंधे
थे
जिनके
सर
गए
उसको
गले
से
ही
लगा
कर
हम
बचे
दिल
से
उसे
जो
भी
लगाए
मर
गए
उम्मीद
उन
सेे
थी
हमें
इस
बात
की
उनको
कभी
जाना
नहीं
था
पर
गए
वो
लोग
शेर-ओ-शाइरी
से
दूर
थे
बे-बहर
को
भी
जो
ग़ज़ल
कह
कर
गए
काँटा
बना
कर
वो
गई
है
फूल
को
'शिव'
चुभ
न
जाए
तोड़ने
तुम
गर
गए
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Shiv
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