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Shiv
ham zamaane yaad karke ro rahe the
ham zamaane yaad karke ro rahe the | हम ज़माने याद करके रो रहे थे
- Shiv
हम
ज़माने
याद
करके
रो
रहे
थे
उसके
शाने
याद
करके
रो
रहे
थे
चुप
कराने
कोई
आएगा
हमें
अब
इस
बहाने
याद
करके
रो
रहे
थे
भूल
बैठे
थे
अगर
सब
यार
को
तो
दिन
पुराने
याद
करके
रो
रहे
थे
मर
गए
भूखे
सभी
कुल्फ़त
में
बच्चे
बाप
दाने
याद
करके
रो
रहे
थे
दोष
है
'शिव'
इस
कदर
रोते
नहीं
हैं
सो
सिराने
याद
करके
रो
रहे
थे
- Shiv
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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इज़हार
पे
भारी
है
ख़मोशी
का
तकल्लुम
हर्फ़ों
की
ज़बाँ
और
है
आँखों
की
ज़बाँ
और
Haneef akhgar
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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तेरा
चुप
रहना
मेरे
ज़ेहन
में
क्या
बैठ
गया
इतनी
आवाज़ें
तुझे
दीं
कि
गला
बैठ
गया
Tehzeeb Hafi
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क्या
ख़ूब
तुम
ने
ग़ैर
को
बोसा
नहीं
दिया
बस
चुप
रहो
हमारे
भी
मुँह
में
ज़बान
है
Mirza Ghalib
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मुझ
में
रहते
हैं
करोड़ों
लोग
चुप
कैसे
रहूँ
हर
ग़ज़ल
अब
सल्तनत
के
नाम
एक
बयान
है
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Dushyant Kumar
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आप
जिस
चीज़
को
कहते
हैं
कि
बेहोशी
है
वो
दिमाग़ों
में
ज़रा
देर
की
ख़ामोशी
है
सूखते
पेड़
से
पंछी
का
जुदा
हो
जाना
ख़ुद-परस्ती
नहीं
एहसान-फ़रामोशी
है
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Ashu Mishra
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हर
एक
बात
को
चुप-चाप
क्यूँँ
सुना
जाए
कभी
तो
हौसला
कर
के
'नहीं'
कहा
जाए
Nida Fazli
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चुप
रहते
हैं
चुप
रहने
दो
राज़
बताओ
खोले
क्या
बात
वफ़ा
की
तुम
करती
हो
बोलो
हम
कुछ
बोले
क्या
उल्फ़त
तो
अफ़साना
है
तुम
करती
खूब
सियासत
हो
हम
भी
हैं
मक़बूल
बहुत
अब
बोल
किसी
के
होलें
क्या
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Anand Raj Singh
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मेरे
होंटों
पे
ख़ामुशी
है
बहुत
इन
गुलाबों
पे
तितलियाँ
रख
दे
Shakeel Azmi
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उसे
कम
कर
रहा
हूँ
दिन-ब-दिन
थोड़ा
उसे
इक
दम
से
भूला
जा
नहीं
सकता
Shiv
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निकल
के
उसकी
आँखों
से
करेंगे
क्या
सभी
दरिया
की
आँखों
से
बहेंगे
हम
Shiv
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सड़
गया
रक्खा
हुआ
पानी
भी
ख़ुद
ही
कब
तलक़
हम
आप
को
यूँँ
साथ
रखते
Shiv
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मेरा
उस
शख़्स
पे
मरना
तो
लाज़िम
है
मिरा
जीने
को
भी
अब
जी
नहीं
करता
Shiv
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उम्मीद
उन
सेे
थी
हमें
इस
बात
की
उनको
कभी
जाना
नहीं
था
पर
गए
Shiv
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