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Shivang Tiwari
shikaar aapko jab shikaari lage
shikaar aapko jab shikaari lage | शिकार आपको जब शिकारी लगे
- Shivang Tiwari
शिकार
आपको
जब
शिकारी
लगे
तो
सर
पर
अजब
ख़ौफ़
तारी
लगे
जिसे
आख़िरत
अपनी
प्यारी
लगे
इबादत
उसे
फिर
न
भारी
लगे
है
नादिम
वो
अपनी
ख़ता
पर
मगर
ज़माने
को
ये
ख़ाकसारी
लगे
भरोसा
उठा
है
तभी
से
हमें
मोहब्बत
तेरी
इश्तिहारी
लगे
किसी
की
न
लग
जाए
इसको
नज़र
ये
यारी
हमें
सब
सेे
प्यारी
लगे
नज़र
से
अगर
कोई
गिर
जाए
तो
हमें
उसका
हँसना
भी
कारी
लगे
ग़ज़ल
ऐसी
कहना
है
तुम
को
‘शिवम्’
जहाँ
में
सभी
को
जो
प्यारी
लगे
- Shivang Tiwari
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ये
यक़ीं
है
की
मेरी
उल्फ़त
का
होगा
उन
पर
असर
कभी
न
कभी
Anwar Taban
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हम
आज
राह-ए-तमन्ना
में
जी
को
हार
आए
न
दर्द-ओ-ग़म
का
भरोसा
रहा
न
दुनिया
का
Waheed Quraishi
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यूँँ
न
क़ातिल
को
जब
यक़ीं
आया
हम
ने
दिल
खोल
कर
दिखाई
चोट
Fani Badayuni
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यक़ीन
कर
वो
तिरे
पास
लौट
आएगा
जब
उस
का
उठने
लगेगा
यक़ीन
लोगों
से
Varun Anand
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वतन
की
ख़ाक
ज़रा
एड़ियाँ
रगड़ने
दे
मुझे
यक़ीन
है
पानी
यहीं
से
निकलेगा
Unknown
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भरोसा
मुझ
पे
रक्खो
और
कुछ
पल
रुका
हूँ,
मैं
अभी
हारा
नहीं
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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जहाँ
तक
मुझ
सेे
मतलब
है
जहाँ
को
वही
तक
मुझको
पूछा
जा
रहा
है
ज़माने
पर
भरोसा
करने
वालों
भरोसे
का
ज़माना
जा
रहा
है
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Naeem Akhtar Khadimi
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उसी
का
शहर
वही
मुद्दई
वही
मुंसिफ़
हमें
यक़ीं
था
हमारा
क़ुसूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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मुझे
यक़ीं
है
ये
ज़हमत
नहीं
करेगा
कोई
बिना
गरज़
के
मोहब्बत
नहीं
करेगा
कोई
न
ख़ानदान
में
पहले
किसी
ने
इश्क़
किया
हमारे
बाद
भी
हिम्मत
नहीं
करेगा
कोई
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Asad Taskeen
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तुम
मिरी
ज़िंदगी
हो
ये
सच
है
ज़िंदगी
का
मगर
भरोसा
क्या
Bashir Badr
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उम्र
लगती
है
दिल
सजाने
में
यार
रूठा
हुआ
मनाने
में
जब
तलक
दिल
को
ठोकरें
न
लगें
अक़्ल
आती
नहीं
ठिकाने
में
बे-वफ़ा
से
वफ़ा
की
उम्मीदें
आप
रहते
हैं
किस
ज़माने
में
सर
को
भीतर
ही
रखिए
साहिब
जी
सौ
निशाने
हैं
इस
निशाने
में
ज़िक्र
तेरा
यूँँ
बेख़ुदी
में
हुआ
सदियाँ
लगतीं
हैं
ग़म
भुलाने
में
बात
अब
भी
ख़ुलूस
की
है
अगर
कोई
सानी
नहीं
बनाने
में
प्यार
का
गीत
कितना
मुश्किल
है
जान
जाती
है
गुनगुनाने
में
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Shivang Tiwari
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तुम्हें
इश्क़
शायद
ये
पहला
हुआ
है
हमारा
मगर
दूसरी
मर्तबा
है
कहाँ
रूठना
है
कहाँ
तक
मनाना
हमें
मत
सिखाओ
हमें
सब
पता
है
है
कू-ए-बुताँ
में
मकाँ
एक
ख़ाली
किराए
पे
लेने
को
दिल
चाहता
है
मेरा
दिल
हुआ
जा
रहा
उसके
महकूम
उसी
की
धिनक-धिन
पे
बस
नाचता
है
जराहत
के
क़ाबिल
है
कमबख़्त
दिल
ये
हमेशा
मुसीबत
में
ही
डालता
है
दिलों
पे
हुकूमत
न
कर
पाए
तो
तुम
सिकंदर
अगर
हो
भी
जाओ
तो
क्या
है
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Shivang Tiwari
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भूल
मेरी
न
तुझ
सेे
भुलाई
गई
इक
कहानी
ज़फ़ा
की
बनाई
गई
रंजिश-ए-बेजा
पे
था
यक़ीं
आपको
झूठ
को
सच
बता
जो
उड़ाई
गई
बस
रक़ीबों
की
चाहत
थी
बर्बादियाँ
आग
सारे
चमन
में
लगाई
गई
हर
बुराई
लगा
हुस्न
के
माथे
पे
हर
कमी
इश्क़
की
है
छुपाई
गई
वस्ल
को
भूलकर
आग
दरिया
किया
और
उस
पे
जुदाई
बढ़ाई
गई
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Shivang Tiwari
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उलझे
ख़याल
दे
कर
ये
साल
चल
दिया
है
दिल
को
मलाल
दे
कर
ये
साल
चल
दिया
है
कब
कैसे
किस
तरह
क्यूँ
कितना
कहाँ
गँवाया
कितने
सवाल
दे
कर
ये
साल
चल
दिया
है
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Shivang Tiwari
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अप्सरा
सी
लगी
दिल
ठगा
रह
गया
तुमको
देखा
तो
बस
देखता
रह
गया
तुम
सेे
मिलने
से
पहले
मैं
ही
मैं
मगर
बाद
मिलने
के
तेरा
पता
रह
गया
हाथ
घूँघट
उठाने
को
आगे
बढ़े
जिस्म
पूरा
मेरा
काँपता
रह
गया
सच
की
राहों
पे
आगे
बढ़ें
किस
तरह
झूठ
दिल
में
अगर
भौंकता
रह
गया
जिस्म
देखा
मगर
रूह
देखी
नहीं
एक
पहलू
ये
भी
अनछुआ
रह
गया
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Shivang Tiwari
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