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karan singh rajput
kabhi samjhe koi udaasi hamaari
kabhi samjhe koi udaasi hamaari | कभी समझे कोई उदासी हमारी
- karan singh rajput
कभी
समझे
कोई
उदासी
हमारी
कि
तंग
आ
गई
है
ख़मोशी
हमारी
- karan singh rajput
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बहुत
उदास
था
उस
दिन
मगर
हुआ
क्या
था
हर
एक
बात
भली
थी
तो
फिर
बुरा
क्या
था
Javed Nasir
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अब
उदास
फिरते
हो
सर्दियों
की
शामों
में
इस
तरह
तो
होता
है
इस
तरह
के
कामों
में
Shoaib Bin Aziz
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ख़ाली
पड़ा
है
और
उदासी
भरा
है
दिल
सो
लोग
इस
मकान
से
आगे
निकल
गए
Ankit Maurya
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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लम्हे
उदास
उदास
फ़ज़ाएं
घुटी
घुटी
दुनिया
अगर
यही
है
तो
दुनिया
से
बच
के
चल
Shakeel Badayuni
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कोई
ख़ुद-कुशी
की
तरफ़
चल
दिया
उदासी
की
मेहनत
ठिकाने
लगी
Adil Mansuri
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किसी
से
दूरी
बनाई
किसी
के
पास
रहे
हज़ार
कोशिशें
कर
लीं
मगर,
उदास
रहे
Sawan Shukla
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ज़िंदगी
भर
वो
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
एक
तस्वीर
जो
हँसते
हुए
खिंचवाई
थी
Yasir Khan
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कुछ
तबीयत
में
उदासी
भी
हुआ
करती
है
हर
कोई
इश्क़
का
मारा
हो,
ज़रूरी
तो
नहीं
Jaani Lakhnavi
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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जाने
क्यूँँ
कुछ
और
दिखता
ही
नहीं
सामने
जब
चेहरा
तेरा
होता
है
karan singh rajput
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कोई
हमको
मनाएगा
भी
तो
कैसे?
बहुत
रूठे
हुए
है
ज़िन्दगी
से
हम
karan singh rajput
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कमज़ोर
ना
जानो
दिए
को
ऐं
-
हवाओं
इस
तरह
ख़ामोश
हैं
तो
क्या
बग़ावत
भी
हो
सकती
है
कभी
karan singh rajput
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कि
सब
दिन
रोज़
इक
जैसे
गुज़रते
थे
नया
इक
मोड़
देना
अब
ज़रूरी
था
karan singh rajput
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पहले
होली
गई
फिर
दिवाली
गई
बिन
तेरे
अब
मेरी
ईद
ख़ाली
गई
karan singh rajput
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