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karan singh rajput
agar ab bhi kabhi uski gali se jab guzarte hai
agar ab bhi kabhi uski gali se jab guzarte hai | अगर अब भी कभी उसकी गली से जब गुजरते है
- karan singh rajput
अगर
अब
भी
कभी
उसकी
गली
से
जब
गुजरते
है
युहीँ
कुछ
देर
फिर
हम
उसके
घर
आगे
ठहरते
है
- karan singh rajput
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तेरी
आवाज़
को
इस
शहर
की
लहरें
तरसती
हैं
ग़लत
नंबर
मिलाता
हूँ
तो
पहरों
बात
होती
है
Ghulam Mohammad Qasir
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जो
सुनते
हैं
कि
तिरे
शहर
में
दसहरा
है
हम
अपने
घर
में
दिवाली
सजाने
लगते
हैं
Jamuna Parsad Rahi
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हमारे
शहर
के
लोगों
का
अब
अहवाल
इतना
है
कभी
अख़बार
पढ़
लेना
कभी
अख़बार
हो
जाना
Ada Jafarey
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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अब
तो
गाँवो
में
भी
ईंटों
के
महल
बसने
लगे
गाँव
की
मिट्टी
से
वो
ख़ुशबू
रूहानी
ख़ो
गई
Divy Kamaldhwaj
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तुम्हें
मैं
क्या
बताऊँ
इस
शहर
का
हाल
कैसा
है
यहाँ
बारिश
तो
होती
है
मगर
सावन
नहीं
आता
Bhaskar Shukla
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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कोई
हाथ
भी
न
मिलाएगा
जो
गले
मिलोगे
तपाक
से
ये
नए
मिज़ाज
का
शहर
है
ज़रा
फ़ासले
से
मिला
करो
Bashir Badr
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ऐ
शहर-ए-जान-ए-जाँ
ऐ
शहर-ए-हमदम
अगर
ज़िन्दा
रहे
फिर
आएँगे
हम
Shajar Abbas
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चाह
थी
दो
जहाँ
की
मगर
देखिए
इक
गली
से
गुज़रता
रहा
उम्र
भर
Ashraf Jahangeer
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उसे
कमजोर
ना
जानो,
बनेगा
कुछ
पढ़ाई
में
अगर
अव्वल
नहीं
होगा
karan singh rajput
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किसी
को
याद
कर
रोता
रहा
मैं
जाने
किस
बात
पर
रोता
रहा
मैं
तुझे
आबाद
रहने
की
दु'आ
देके
मेरे
हालात
पर
रोता
रहा
मैं
हँसी
की
थी
बहुत
सी
बातें
लेकिन
तेरी
हर
बात
पर
रोता
रहा
मैं
तेरे
ख़्वाबों
ने
सोने
ना
दिया
कल
यूँँ
ही
शब
जाग
कर
रोता
रहा
मैं
मेरे
अहबाब
मुझ
सेे
पूछते
है
कि
कल
किस
बात
पर
रोता
रहा
मैं?
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karan singh rajput
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हाँ,
मुश्किल
से
कोई
पहचान
पायेगा
मुझे
घर
में
कई
गुज़रे
हुए
अरसे
ब'अद
घर
जा
रहा
हूँ
मैं
karan singh rajput
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मोहब्बत
को
जीने
की
वजह
न
समझो
मोहब्बत
से
भी
ये
दिल
ऊक
जाएगा
karan singh rajput
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वो
रूठके
अगर
चाहती
है
मैं
मनाऊं
उसे
तो
फिर
ये
प्यार
है
उसका
नखरा
नहीं
karan singh rajput
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