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Sahir banarasi
maine KHuda kya maanga tha tujhse KHuda hi bas
maine KHuda kya maanga tha tujhse KHuda hi bas | मैंने ख़ुदा क्या माँगा था तुझ सेे ख़ुदा ही बस
- Sahir banarasi
मैंने
ख़ुदा
क्या
माँगा
था
तुझ
सेे
ख़ुदा
ही
बस
फिर
क्यूँ
मुझे
कर
ख़ुद
से
दिया
यूँँ
जुदा
ही
बस
- Sahir banarasi
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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मैं
ने
उस
की
तरफ़
से
ख़त
लिक्खा
और
अपने
पते
पे
भेज
दिया
Fahmi Badayuni
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बस
मैं
मायूस
होने
वाला
था
और
मौला
ने
तुझ
को
भेज
दिया
Zubair Ali Tabish
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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जब
से
वो
समुंदर
पार
गया
गोरी
ने
सँवरना
छोड़
दिया
Bekal Utsahi
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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मक़तल-ए-शौक़
के
आदाब
निराले
हैं
बहुत
दिल
भी
क़ातिल
को
दिया
करते
हैं
सर
से
पहले
Ali Sardar Jafri
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कोई
ख़ुद-कुशी
की
तरफ़
चल
दिया
उदासी
की
मेहनत
ठिकाने
लगी
Adil Mansuri
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भारत
के
उपकार
को,
मान
रहे
सब
लोग
रोग
'घटाने'
के
लिए,
दिया
विश्व
को
'योग'
Divy Kamaldhwaj
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तमाम
बातें
जो
चाहता
था
मैं
तुम
सेे
कहना
वो
एक
काग़ज़
पे
लिख
के
काग़ज़
जला
दिया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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तेरी
दुनिया
में
ख़ुदा
कितने
फ़राइज़
हो
गए
नाम
तेरा
ले
ख़ुदा
अब
क़त्ल
जाइज़
हो
गए
वो
मुहब्बत
आज
कल
हमको
पढ़ाने
हैं
लगे
हम
भी
देखें
अब
ज़रा
वो
कितने
फ़ाइज़
हो
गए
धीरे
धीरे
प्यार
का
नश्शा
उतरने
जो
लगा
जितने
'आशिक़
थे
वो
पंडित
और
वाइज़
हो
गए
रात
भर
बोसे
बदन
पर
उनके
जो
पड़ते
रहे
इसलिए
उनकी
ज़रूरत
अब
लज़ाइज़
हो
गए
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Sahir banarasi
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इस
तरफ़
लोग
हैं
उस
ओर
भी
होंगे
'साहिर'
देखो
ये
जंग
में
इंसान
न
मारा
जाए
Sahir banarasi
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जाम
वो
होठ
से
लगाते
हैं
ग़म
से
जो
राब्ता
निभाते
हैं
हम
तो
वो
टूटे
दिल
के
शाइर
हैं
शा'इरी
में
सुने
जो
जाते
हैं
बात
ईमानदारी
की
है
अब
हम
न
खाते
न
ही
खिलाते
हैं
आज
वीरान
है
पड़ी
मस्जिद
ये
नमाज़ी
कहाँ
को
जाते
हैं
अब
रक़ीबों
में
चर्चे
हैं
काफ़ी
आपके
घर
हकीम
आते
हैं
छोड़
कैसे
मैं
देता
सिगरेट
को
वो
कहें
आज
हम
पिलाते
हैं
कर
ली
है
हमने
भी
मुहब्बत
अब
लोग
पागल
हमें
बताते
हैं
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Sahir banarasi
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सोचता
हूँ
चूम
लूँ
उन
हाथों
को
दुनिया
में
जो
शा'इरी
ज़िंदा
रखें
Sahir banarasi
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गीत
कोई
नया
गाओ
यारों
आग
सीने
में
जलाओ
यारों
ये
नया
खूँ
न
कभी
भी
बहके
इसको
गाँधी
से
मिलाओ
यारों
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Sahir banarasi
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