kabhi KHud ko chhukar nahin dekhta hooñ | कभी ख़ुद को छूकर नहीं देखता हूँ

  - Shariq Kaifi
कभीख़ुदकोछूकरनहींदेखताहूँ
ख़ुदाजानेबसवहममेंमुब्तलाहूँ
कहाँतकयेरफ़्तारक़ाएमरहेगी
कहींअबउसेरोकनाचाहताहूँ
वोकरमनालेतोक्याहालहोगा
ख़फ़ाहोकेजबइतनाख़ुशहोरहाहूँ
फ़क़तयेजताताहूँआवाज़देकर
किमैंभीउसेनामसेजानताहूँ
गलीमेंसबअच्छाहीकहतेथेमुझको
मुझेक्यापताथामैंइतनाबुराहूँ
नहींयेसफ़रवापसीकानहींहै
उसेढूँडनेअपनेघरजारहाहूँ
  - Shariq Kaifi
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