ik din KHud ko apne paas bithaaya ham ne | इक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हम ने

  - Shariq Kaifi
इकदिनख़ुदकोअपनेपासबिठायाहमने
पहलेयारबनायाफिरसमझायाहमने
ख़ुदभीआख़िर-कारउन्हींवा'दोंसेबहले
जिनसेसारीदुनियाकोबहलायाहमने
भीड़नेयूँँहीरहबरमानलियाहैवर्ना
अपनेअलावाकिसकोघरपहुँचायाहमने
मौतनेसारीरातहमारीनब्ज़टटोली
ऐसामरनेकामाहौलबनायाहमने
घरसेनिकलेचौकगएफिरपार्कमेंबैठे
तन्हाईकोजगहजगहबिखरायाहमने
इनलम्होंमेंकिसकीशिरकतकैसीशिरकत
उसेबुलाकरअपनाकामबढ़ायाहमने
दुनियाकेकच्चेरंगोंकारोनारोया
फिरदुनियापरअपनारंगजमायाहमने
जब'शारिक़'पहचानगएमंज़िलकीहक़ीक़त
फिररस्तेकोरस्तेभरउलझायाहमने
  - Shariq Kaifi
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