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shampa andaliib
tere pahluu se uth ke jaaun to
tere pahluu se uth ke jaaun to | तेरे पहलू से उठ के जाऊँ तो
- shampa andaliib
तेरे
पहलू
से
उठ
के
जाऊँ
तो
मुझ
को
दुनिया
उदास
करती
है
- shampa andaliib
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एक
हमें
आवारा
कहना
कोई
बड़ा
इल्ज़ाम
नहीं
दुनिया
वाले
दिल
वालों
को
और
बहुत
कुछ
कहते
हैं
Habib Jalib
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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एक
तरफ़
है
पूरी
दुनिया
एक
तरफ़
है
मेरा
घर
लेकिन
तुमको
बतला
दूँ
मैं
दुनिया
से
है
अच्छा
घर
सब
कमरों
की
दीवारों
पर
तस्वीरें
हैं
बस
तेरी
मुझ
सेे
ज़ियादा
तो
लगता
है
जानेमन
ये
तेरा
घर
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Tanoj Dadhich
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जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
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बताऊँ
क्या
तुझे
ऐ
हम-नशीं
किस
से
मोहब्बत
है
मैं
जिस
दुनिया
में
रहता
हूँ
वो
इस
दुनिया
की
औरत
है
Asrar Ul Haq Majaz
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई
दे
लहजे
को
सच्चाई
दे
दुनिया
है
जंगल
का
सफ़र
लछमन
जैसा
भाई
दे
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Tariq Shaheen
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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गर
ज़ियादा
नहीं
तो
थोड़ी
हो
बात
कुछ
देर
हो
पर
अच्छी
हो
एक
कमरा
हो
कुछ
किताबें
हों
और
खिड़की
से
धूप
आती
हो
क्या
ज़रूरत
पड़े
किसी
की
अगर
दोस्त
में
बात
दोस्त
जैसी
हो
ऐसी
ख़्वाहिश
पनप
गई
दिल
में
उम्र
कट
जाए
जो
न
पूरी
हो
जाने
किस
कैफ़ियत
में
होगा
वो
जिस
को
हर
एक
बात
चुभती
हो
ऐसे
लोगों
से
बात
क्या
की
जाए
जिन
की
हर
एक
बात
झूठी
हो
जाने
वाले
चले
गए
शम्पा
आप
किस
कैफ़ियत
में
बैठी
हो
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shampa andaliib
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तिरा
जाना
कहाँ
बर्दाश्त
होगा
गले
लग
जाएँगे
दीवार
से
हम
shampa andaliib
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रोना
भी
चाहा
तो
मुझे
रोने
नहीं
दिया
उस
आँख
ने
सुकून
से
सोने
नहीं
दिया
shampa andaliib
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ये
करामत
है
राहगीरों
की
कब
हटाता
है
रास्ता
मुझ
को
shampa andaliib
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सब
लोग
मेरे
अपने
मेरे
साथ
ही
तो
हैं
मुझ
को
इसी
फ़ितूर
ने
बर्बाद
कर
दिया
shampa andaliib
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