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shampa andaliib
ye karaamat hai raahgeeron ki
ye karaamat hai raahgeeron ki | ये करामत है राहगीरों की
- shampa andaliib
ये
करामत
है
राहगीरों
की
कब
हटाता
है
रास्ता
मुझ
को
- shampa andaliib
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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सच
बोलने
के
तौर-तरीक़े
नहीं
रहे
पत्थर
बहुत
हैं
शहर
में
शीशे
नहीं
रहे
Nawaz Deobandi
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बाद
तेरे
नहीं
कोई
हमें
मंज़िल
की
तलब
हमने
सोचा
है
कि
हम
राह
भटक
जाएँगे
Prince
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काश
वो
रास्ते
में
मिल
जाए
मुझ
को
मुँह
फेर
कर
गुज़रना
है
Fahmi Badayuni
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चलते
हुए
मुझ
में
कहीं
ठहरा
हुआ
तू
है
रस्ता
नहीं
मंज़िल
नहीं
अच्छा
हुआ
तू
है
Abhishek shukla
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तिरे
सिवा
भी
कहीं
थी
पनाह
भूल
गए
निकल
के
हम
तिरी
महफ़िल
से
राह
भूल
गए
Majrooh Sultanpuri
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मक़ाम
'फ़ैज़'
कोई
राह
में
जचा
ही
नहीं
जो
कू-ए-यार
से
निकले
तो
सू-ए-दार
चले
Faiz Ahmad Faiz
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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रास्ता
सोचते
रहने
से
किधर
बनता
है
सर
में
सौदा
हो
तो
दीवार
में
दर
बनता
है
Jaleel 'Aali'
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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एक
तावीज़
की
ज़रूरत
है
लग
गई
फिर
बुरी
नज़र
मुझ
को
shampa andaliib
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कुछ
नए
और
कुछ
पुराने
हो
गए
कहकहे
अब
दफ़्न
सारे
हो
गए
जाओ
देखो
काम
कोई
दूसरा
क्यूँँ
खड़े
सब
मेरे
आगे
हो
गए
फिर
से
खींचा
ध्यान
दुख
ने
और
हम
ग़म-ज़दा
फिर
बैठे
बैठे
हो
गए
किस
लिए
अब
सर
झुका
है
आपका
अब
तो
हम
भी
आप
जैसे
हो
गए
राह
से
मुझ
को
हटा
कर
अंदलीब
मुझ
से
आगे
आज
सारे
हो
गए
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shampa andaliib
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हँसता
ही
जा
रहा
मुझे
हर
कोई
देख
कर
घंटों
से
मुब्तिला
हूँ
मैं
कार-ए-फ़ुज़ूल
में
shampa andaliib
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कार-ए-दुनिया
से
थक
गई
जब
मैं
तेरे
दीदार
से
मिला
आराम
shampa andaliib
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इस
तरह
से
न
आज़मा
मुझ
को
मेहरबाँ
है
तो
दे
दु'आ
मुझ
को
एक
मुद्दत
के
बाद
मिल
पाया
एक
अच्छा
सा
रास्ता
मुझ
को
तेरी
नफ़रत
के
साँप
ने
इक
दिन
आँख
खुलते
ही
डस
लिया
मुझ
को
सब
की
नज़रों
में
थी
हवस
क़ायम
कौन
अंदर
से
देखता
मुझ
को
आज
इक
दम
से
बन
गया
शैतान
कल
जो
लगता
था
देवता
मुझ
को
साथ
उस
के
सफ़र
मैं
करती
हूँ
जो
भी
मिलता
है
बा-वफ़ा
मुझ
को
एक
आज़ाद
अंदलीब
हूँ
मैं
ज़िंदा
देखे
तो
कर
रिहा
मुझ
को
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shampa andaliib
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