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Milind samar
kahii likhe hain teraa meraa naam ek saath ab
kahii likhe hain teraa meraa naam ek saath ab | कही लिखे हैं तेरा मेरा नाम एक साथ अब
- Milind samar
कही
लिखे
हैं
तेरा
मेरा
नाम
एक
साथ
अब
पुकारते
हैं
तेरा
मेरा
नाम
एक
साथ
अब
थे
अपने
वस्ल
के
ख़िलाफ़
वो
जो
लोग
,वोही
अब
तराशते
हैं
तेरा
मेरा
नाम
एक
साथ
अब
अलग
अलग
न
पूछता
कोई
भी
अपने
नाम
अब
वो
पूछते
हैं
तेरा
मेरा
नाम
एक
साथ
अब
- Milind samar
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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सब
की
हिम्मत
नहीं
ज़माने
में
लोग
डरते
हैं
मुस्कुराने
में
एक
लम्हा
भी
ख़र्च
होता
नहीं
मेरी
ख़ुशियों
को
आने
जाने
में
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Vishal Singh Tabish
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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ये
लोग
कौन
हैं
आख़िर
कहाँ
से
आते
हैं
जो
जिस्म
नोच
के
फिर
बेटियाँ
जलाते
हैं
Shajar Abbas
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मैं
चीख़ता
रहा
कुछ
और
भी
है
मेरा
इलाज
मगर
ये
लोग
तुम्हारा
ही
नाम
लेते
रहे
Anjum Saleemi
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इंसाँ
की
ख़्वाहिशों
की
कोई
इंतिहा
नहीं
दो
गज़
ज़मीं
भी
चाहिए
दो
गज़
कफ़न
के
बाद
Kaifi Azmi
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जो
लोग
ख़ुद
न
करते
थे
होंठों
से
पान
साफ़
पलकों
से
कर
रहे
हैं
तेरा
पायदान
साफ़
Charagh Sharma
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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तलब
करें
तो
ये
आँखें
भी
इन
को
दे
दूँ
मैं
मगर
ये
लोग
इन
आँखों
के
ख़्वाब
माँगते
हैं
Abbas rizvi
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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दर्द
इस
बात
का
था
लिखे
शे'र
जो
मैंने
बर्बाद
तुम
जैसे
पे
हैं
किए
Milind samar
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अब
लिखा
हर
शे'र
मेरा
इश्क़
माँगे
मैं
नहीं
हर
शख़्स
तेरा
इश्क़
माँगे
Milind samar
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न
साथ
थे
हम
न
पास
थे
हम
न
एक
दूजे
की
आस
थे
हम
पता
चला
बाद-अज़
में
मुझको
हँसी
की
उसकी
मिठास
थे
हम
सुकून
इक
दूज़े
से
था
हमको
के
एक
दूज़े
की
प्यास
थे
हम
रहा
न
वो
इश्क़
ज़िंदगी
भर
इस
इक
वजह
से
उदास
थे
हम
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Milind samar
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क्या
लिखनी
क्या
पढ़नी
ये
ग़ज़लें
मेरी
अब
आओ
चलो
वो
आँखें
पढ़कर
आते
है
Milind samar
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अब
मिल
भी
जाए
वो
तो
मैं
छोड़
दूँगा
उसको
मैं
उस
ही
की
तरह
तोड़
दूँगा
उलफ़त
की
मंज़िल
आख़िरी
वो
हुई
तो
मैं
अपना
रस्ता
और
कहीं
मोड़
दूँगा
रखना
मेरे
ग़म
को
सँभाले,
मैं
इक
दिन
इन
के
दर्दों
से
उसको
झिंझोड़
दूँगा
ख़ुश
है
हम
रोता
देख
उसको
“शामिल”
आख़िर
अब
मैं
दिल
और
कहीं
जोड़
दूँगा
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Milind samar
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