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Milind samar
ab mil bhi jaa.e vo to main chhod dooñga
ab mil bhi jaa.e vo to main chhod dooñga | अब मिल भी जाए वो तो मैं छोड़ दूँगा
- Milind samar
अब
मिल
भी
जाए
वो
तो
मैं
छोड़
दूँगा
उसको
मैं
उस
ही
की
तरह
तोड़
दूँगा
उलफ़त
की
मंज़िल
आख़िरी
वो
हुई
तो
मैं
अपना
रस्ता
और
कहीं
मोड़
दूँगा
रखना
मेरे
ग़म
को
सँभाले,
मैं
इक
दिन
इन
के
दर्दों
से
उसको
झिंझोड़
दूँगा
ख़ुश
है
हम
रोता
देख
उसको
“शामिल”
आख़िर
अब
मैं
दिल
और
कहीं
जोड़
दूँगा
- Milind samar
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ये
रख
रखाव
कभी
ख़त्म
होने
वाला
नहीं
बिछड़ते
वक़्त
भी
तुझको
गुलाब
दूँगा
मैं
Khurram Afaq
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यूँँ
दिल
को
तड़पने
का
कुछ
तो
है
सबब
आख़िर
या
दर्द
ने
करवट
ली
या
तुम
ने
इधर
देखा
Jigar Moradabadi
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वो
एक
दिन
जो
तुझे
सोचने
में
गुज़रा
था
तमाम
उम्र
उसी
दिन
की
तर्जुमानी
है
Abhishek shukla
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अब
मिरा
ध्यान
कहीं
और
चला
जाता
है
अब
कोई
फ़िल्म
मुकम्मल
नहीं
देखी
जाती
Jawwad Sheikh
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रफ़्ता
रफ़्ता
ख़त्म
क़िस्सा
हो
गया,
होना
ही
था
वो
भी
आख़िर
मेरे
जैसा
हो
गया,
होना
ही
था
Ashar Najmi
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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चलता
रहने
दो
मियाँ
सिलसिला
दिलदारी
का
आशिक़ी
दीन
नहीं
है
कि
मुकम्मल
हो
जाए
Abbas Tabish
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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उस
के
होंटों
पे
रख
के
होंट
अपने
बात
ही
हम
तमाम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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दर्द
इस
बात
का
था
लिखे
शे'र
जो
मैंने
बर्बाद
तुम
जैसे
पे
हैं
किए
Milind samar
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सवाल
एक
मगर
दो
जवाब
माँग
लिए
छुपा
रखे
थे
जो
उसने
वो
ख़्वाब
माँग
लिए
बहुत
से
फूल
खिले
थे
मगर
रक़ीबों
ने
जो
मेरे
हक़
के
थे
वो
ही
गुलाब
माँग
लिए
ये
कैसा
खेल
था
सरकार
ने
दिखाए
जो
कहीं
मकान
कहीं
तो
हिजाब
माँग
लिए
अजीब
है
ये
रिवायात
इश्क़
की
“शामिल”
कभी
शबाब
कभी
तो
अज़ाब
माँग
लिए
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Milind samar
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अब
लिखा
हर
शे'र
मेरा
इश्क़
माँगे
मैं
नहीं
हर
शख़्स
तेरा
इश्क़
माँगे
Milind samar
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कही
लिखे
हैं
तेरा
मेरा
नाम
एक
साथ
अब
पुकारते
हैं
तेरा
मेरा
नाम
एक
साथ
अब
थे
अपने
वस्ल
के
ख़िलाफ़
वो
जो
लोग
,वोही
अब
तराशते
हैं
तेरा
मेरा
नाम
एक
साथ
अब
अलग
अलग
न
पूछता
कोई
भी
अपने
नाम
अब
वो
पूछते
हैं
तेरा
मेरा
नाम
एक
साथ
अब
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Milind samar
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मेरे
दिल
की
कहानी
है
वही
तुमको
सुनानी
है
मिले
है
ज़ख़्म
जो
उस
से
ये
सब
उनकी
बयानी
है
न
ज़ख़्मों
को
छुओ
मेरे
न
ही
महरम
लगाओ
तुम
किया
था
इश्क़
जो
मैंने
ये
सब
उसकी
निशानी
है
सजाए
पैर
उसके
पायलों
से
थे
कभी
मैंने
मुझे
माथे
पे
अब
तो
उसके
इक
बिंदी
सजानी
है
शराबों
से
है
यारी
अब
मोहब्बत
शा'इरी
मेरी
शराब-ओ-शायरी
में
डूबी
ये
मेरी
जवानी
है
रुलाया
है
बहुत
लोगों
ने
ये
कह
कर
मुझे
“शामिल”
जिसे
चाहा
है
तूने
वो
किसी
दूजे
की
रानी
है
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Milind samar
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