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Shakir Dehlvi
muflison ko kahaan muyassar hai
muflison ko kahaan muyassar hai | मुफ़्लिसों को कहाँ मुयस्सर है
- Shakir Dehlvi
मुफ़्लिसों
को
कहाँ
मुयस्सर
है
शर्त
दौलत
है
दोस्ती
के
लिए
- Shakir Dehlvi
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जिस
तरफ़
तू
है
उधर
होंगी
सभी
की
नज़रें
ईद
के
चाँद
का
दीदार
बहाना
ही
सही
Amjad Islam Amjad
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मिलने
की
तरह
मुझ
सेे
वो
पल
भर
नहीं
मिलता
दिल
उस
से
मिला
जिस
सेे
मुक़द्दर
नहीं
मिलता
Naseer Turabi
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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प्यास
जहाँ
की
एक
बयाबाँ
तेरी
सख़ावत
शबनम
है
पी
के
उठा
जो
बज़्म
से
तेरी
और
भी
तिश्ना-काम
उठा
Ali Sardar Jafri
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ये
दाग़
दाग़
उजाला
ये
शब-गज़ीदा
सहर
वो
इंतिज़ार
था
जिस
का
ये
वो
सहर
तो
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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तमाम
फ़र्क़
मोहब्बत
में
एक
बात
के
हैं
वो
अपनी
ज़ात
का
नईं
है
हम
उस
की
ज़ात
के
हैं
Pallav Mishra
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मैं
सात
साल
से
अब
तक
हिसार-ए-इश्क़
में
हूँ
वो
शख़्स
आज
भी
मेरे
दिल-ओ-दिमाग़
में
है
Amaan Haider
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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मौत
को
इक
बहाना
काफ़ी
है
सौ
बहाने
हैं
ज़िन्दगी
के
लिए
Shakir Dehlvi
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फिर
उसने
खोल
दिए
सारे
रास्ते
मुझ
पर
वो
थक
गया
था
मेरा
सब्र
आज़माते
हुए
Shakir Dehlvi
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बिछड़
के
हम
सेे
कहो
गुज़ारा
नहीं
हुआ
ना
हमारी
तरह
कोई
तुम्हारा
नहीं
हुआ
ना
Shakir Dehlvi
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हर
शब
इक
ख़्वाब
सलोना
भी
और
धूप
खिले
तक
सोना
भी
बातों
में
उसकी
जाल
भी
है
आँखों
में
जादू
टोना
भी
क्या
शय
है
मोहब्बत
इस
में
सुकूँ
देता
है
तड़पना
रोना
भी
दीदार
का
तालिब
मैं
ही
नहीं
है
घर
का
कोना
कोना
भी
पैदा
करता
है
बेज़ारी
हर
वक़्त
मुयस्सर
होना
भी
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Shakir Dehlvi
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रोज़
तारीख़
कैलेंडर
में
बदल
जाती
थी
फिर
वो
तारीख़
भी
आई
कि
कैलेंडर
बदला
Shakir Dehlvi
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