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Shakir Dehlvi
phir usne khol diye saare raaste mujh par
phir usne khol diye saare raaste mujh par | फिर उसने खोल दिए सारे रास्ते मुझ पर
- Shakir Dehlvi
फिर
उसने
खोल
दिए
सारे
रास्ते
मुझ
पर
वो
थक
गया
था
मेरा
सब्र
आज़माते
हुए
- Shakir Dehlvi
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इस
दुनिया
के
कहने
पर
उम्मीद
न
रक्खो
पत्थर
रख
लो
सीने
पर
उम्मीद
न
रक्खो
Vishal Singh Tabish
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तूफ़ान
की
उम्मीद
थी
आँधी
नहीं
आई
वो
आप
तो
क्या
उस
की
ख़बर
भी
नहीं
आई
शायद
वो
मोहब्बत
के
लिए
ठीक
नहीं
था
शायद
ये
अँगूठी
उसे
पूरी
नहीं
आई
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Khurram Afaq
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इक
लड़की
से
बात
करो
तो
लगता
है
इस
दुनिया
को
छोड़
के
भी
इक
दुनिया
है
Shadab Asghar
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सहने
वाले
को
गर
सब्र
आ
जाए
तो
फिर
समझो
कहने
वालों
की
औक़ात
फ़क़त
दो
कौड़ी
की
है
A R Sahil "Aleeg"
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हम
हैं
रहे-उम्मीद
से
बिल्कुल
परे
परे
अब
इंतज़ार
आपका
कोई
करे!
करे!
मैंने
तो
यूँँ
ही
अपनी
तबीयत
सुनाई
थी
तुम
तो
लगीं
सफाइयाँ
देने,
अरे!
अरे!
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Balmohan Pandey
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हर
कोई
सब्र
की
तलक़ीन
किया
करता
है
पर
कोई
ये
तो
बताए
कि
करूँँ
मैं,
कैसे?
Afzal Ali Afzal
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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हासिल
न
कर
पाया
तुझे
मैं
मिन्नतों
के
बाद
भी
उम्मीद
सेंटा
से
लगाना
लाज़मी
भी
है
मिरा
Harsh saxena
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जिसकी
फ़ितरत
ही
बे
वफ़ाई
हो
उस
सेे
उम्मीद-ए-वफ़ा
क्या
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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वो
लफ़्ज़
अब
भी
नक़्श
हैं
ज़ेहन
ओ
गुमान
में
तुमने
कभी
कहा
था
मेरी
ज़िन्दगी
हो
तुम
Shakir Dehlvi
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नींद
आई
तो
धूप
खिले
तक
सोएंगे
ख़्वाबों
की
फ़ेहरिस्त
बना
कर
बैठे
हैं
Shakir Dehlvi
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भँवर
ये
देख
कर
हैरत
ज़दा
है
किनारा
कश्तियों
को
खा
रहा
है
Shakir Dehlvi
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ये
जो
रुख़
पर
तेरे
तबस्सुम
है
इसके
उस
पार
देखना
है
मुझे
Shakir Dehlvi
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रुठते
किस
से
और
मनाता
कौन
माँ
न
होती
तो
नाज़
उठाता
कौन
Shakir Dehlvi
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