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Shakir Dehlvi
ruthte kis se aur manaata kaun
ruthte kis se aur manaata kaun | रुठते किस से और मनाता कौन
- Shakir Dehlvi
रुठते
किस
से
और
मनाता
कौन
माँ
न
होती
तो
नाज़
उठाता
कौन
- Shakir Dehlvi
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हम
पे
एहसान
हैं
उदासी
के
मुस्कुराएँ
तो
शर्म
आती
है
Varun Anand
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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जिसका
तारा
था
वो
आँखें
सो
गई
हैं
अब
कहाँ
करता
है
मुझ
पर
नाज़
कोई
Aalok Shrivastav
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है
नाज़
मुझको
अपनी
हिंदी
ज़बाँ
पे
यारो
हिंदी
हैं
हम
वतन
हैं
ये
देश
सब
सेे
आला
Dr Mohsin Khan
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काबा
किस
मुँह
से
जाओगे
'ग़ालिब'
शर्म
तुम
को
मगर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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कोर्ट
में
तारीख़
के
ये
सिलसिले
चलते
रहे
और
वो
लड़की
वहाँँ
पर
शर्म
से
ही
मर
गई
Sunny Seher
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ज़िंदा
रहने
की
ये
तरक़ीब
निकाली
हमने
बात
बिगड़ी
हुई
कुछ
ऐसे
सँभाली
हमने
उस
सेे
समझौता
किया
है
उसी
की
शर्तों
पे
जान
भी
बच
गई
इज़्ज़त
भी
बचा
ली
हमने
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Divyansh Shukla
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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शुमार
अपना
भी
हो
जाए
अदब
के
नाम
चीनों
में
ख़ुदा
कुछ
शे'र
कहला
दे
अगर
मुश्किल
ज़मीनों
में
मैं
फ़न्न-ए-शा'इरी
पर
इसलिए
क़ुर्बान
हूँ
रहबर
नहीं
मिलता
ये
गौहर
बादशाहों
के
ख़ज़ीनों
में
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Moid Rahbar
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जलता
नहीं
हूँ
आतिश-ए-रुख़सार
देख
कर
करता
हूँ
नाज़
ताक़त-ए-दीदार
देख
कर
Shaikh Sohail
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चलो
मिल
कर
बनाते
हैं
मोहब्बत
की
नई
दुनिया
तुम
अपना
आसमाँ
लाओ
मैं
लाता
हूँ
ज़मीं
अपनी
Shakir Dehlvi
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कुछ
शिकायत
है
तो
घर
आओ
कभी
फ़ुर्सत
में
मैं
तमाशा
सर-ए-बाज़ार
नहीं
कर
सकता
Shakir Dehlvi
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वो
लफ़्ज़
अब
भी
नक़्श
हैं
ज़ेहन
ओ
गुमान
में
तुमने
कभी
कहा
था
मेरी
ज़िन्दगी
हो
तुम
Shakir Dehlvi
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बहुत
मुश्किल
है
इन्साँ
बन
के
जीना
फ़रिश्ते
कह
रहे
थे
कल
किसी
से
Shakir Dehlvi
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सिर्फ़
काग़ज़
क़लम
नहीं
साहब
ख़ूं
भी
लगता
है
शा'इरी
के
लिए
Shakir Dehlvi
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