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Shakir Dehlvi
bichhad ke hamse kaho guzaara nahin hua nahamaari tarah koi tumhaara nahin hua na
bichhad ke hamse kaho guzaara nahin hua nahamaari tarah koi tumhaara nahin hua na | बिछड़ के हम सेे कहो गुज़ारा नहीं हुआ ना
- Shakir Dehlvi
बिछड़
के
हम
सेे
कहो
गुज़ारा
नहीं
हुआ
ना
हमारी
तरह
कोई
तुम्हारा
नहीं
हुआ
ना
- Shakir Dehlvi
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भरम
रखा
है
तेरे
हिज्र
का
वरना
क्या
होता
है
मैं
रोने
पे
आ
जाऊँ
तो
झरना
क्या
होता
है
मेरा
छोड़ो
मैं
नइँ
थकता
मेरा
काम
यही
है
लेकिन
तुमने
इतने
प्यार
का
करना
क्या
होता
है
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Tehzeeb Hafi
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मेरे
मिज़ाज
की
उसको
ख़बर
नहीं
रही
है
ये
बात
मेरे
गले
से
उतर
नहीं
रही
है
ये
रोने-धोने
का
नाटक
तवील
मत
कर
अब
बिछड़
भी
जाए
तू
मुझ
सेे
तो
मर
नहीं
रही
है
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Ashutosh Vdyarthi
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नाम
पे
हम
क़ुर्बान
थे
उस
के
लेकिन
फिर
ये
तौर
हुआ
उस
को
देख
के
रुक
जाना
भी
सब
से
बड़ी
क़ुर्बानी
थी
मुझ
से
बिछड़
कर
भी
वो
लड़की
कितनी
ख़ुश
ख़ुश
रहती
है
उस
लड़की
ने
मुझ
से
बिछड़
कर
मर
जाने
की
ठानी
थी
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Jaun Elia
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ख़ुदा
करे
कि
तिरी
उम्र
में
गिने
जाएँ
वो
दिन
जो
हम
ने
तिरे
हिज्र
में
गुज़ारे
थे
Ahmad Nadeem Qasmi
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उस
मेहरबाँ
नज़र
की
इनायत
का
शुक्रिया
तोहफ़ा
दिया
है
ईद
पे
हम
को
जुदाई
का
Unknown
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियांँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियाँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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उभर
कर
हिज्र
के
ग़म
से
चुनी
है
ज़िंदगी
हमने
वगरना
हम
जहाँ
पर
थे
वहाँ
पर
ख़ुद-कुशी
भी
थी
Naved sahil
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मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
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मर्म
हँसने
का
समझ
पाए
ज़रा
हम
देर
से
वस्ल
जिसको
कह
रहे
थे
हिज्र
की
बुनियाद
थी
Atul K Rai
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उम्र
भर
हम
साथ
चल
कर
भी
अकेले
ही
रहे
मैं
इधर
था
वो
उधर
और
इक
नदी
थी
दरम्याँ
Shakir Dehlvi
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हार
जाओगे
क्यूँँ
उलझते
हो
तुम
फ़रिश्ते
हो
आदमी
हूँ
मैं
Shakir Dehlvi
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हम
सेे
मिल
कर
देखिए
अच्छा
लगेगा
आप
को
आदमिय्यत
के
अभी
तक
अनछुए
पहलू
हैं
हम
Shakir Dehlvi
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आसमाँ
जब
ज़मीं
पे
बैठ
गया
जो
जहाँ
था
वहीं
पे
बैठ
गया
कुछ
सितारे
ज़मीं
पे
रौशन
थे
मैं
भी
जाकर
वहीं
पे
बैठ
गया
इक
कबूतर
ख़याल
का
तेरे
उड़
के
आया
जबीं
पे
बैठ
गया
बल्लियों
कूदता
उछलता
दिल
आपकी
इक
नहीं
पे
बैठ
गया
मुफ़्त
में
दे
दिया
मकान-ए-दिल
जब
भरोसा
मकीं
पे
बैठ
गया
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Shakir Dehlvi
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ये
जो
कहते
हैं
कि
हम
तैर
के
बाहर
आए
ये
हैं
दरअस्ल
समुंदर
के
उछाले
हुए
लोग
Shakir Dehlvi
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