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Shakir Dehlvi
abhii chubhta hooñ aankhoñ men tumhaari
abhii chubhta hooñ aankhoñ men tumhaari | अभी चुभता हूँ आँखों में तुम्हारी
- Shakir Dehlvi
अभी
चुभता
हूँ
आँखों
में
तुम्हारी
दु'आओं
में
मुझे
माँगा
करोगे
- Shakir Dehlvi
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पहले
पहले
तो
कोई
ज़ेहन
में
डर
उगता
है
फिर
उसी
डर
से
किसी
भूत
का
सर
उगता
है
Shakir Dehlvi
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ख़ामुशी
दूरियाँ
बढ़ाती
है
और
बढ़ाती
है
बद-गुमानी
भी
Shakir Dehlvi
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हमारी
बस्ती
से
लश्कर
ये
कह
के
लौट
गया
चलो
यहाँ
से
यहाँ
सरफ़रोश
रहते
हैं
Shakir Dehlvi
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तो
क्या
कुछ
भी
नहीं
क़ीमत
हमारी
अगर
अच्छी
नहीं
सूरत
हमारी
ज़ियादा
है
कहीं
लागत
हमारी
लगाओ
ठीक
से
क़ीमत
हमारी
झपकना
भूल
जाओगे
ये
पलकें
करेगी
रक़्स
जब
वहशत
हमारी
मिले
होते
हमें
तुम
काश
पहले
लिखी
जाती
थी
जब
क़िस्मत
हमारी
यही
इक
ऐब
है
मरते
हैं
तुम
पर
यही
इक
ऐब
है
शोहरत
हमारी
हमें
तुम
मुस्कुरा
कर
देख
लेना
हमें
मिल
जाएगी
क़ीमत
हमारी
यहीं
बैठी
थी
माँ
कुछ
देर
पहले
यहीं
पर
थी
अभी
जन्नत
हमारी
ज़रा
मिलने
से
पहले
सोच
लेना
तुम्हें
पड़
जाएगी
आदत
हमारी
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Shakir Dehlvi
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मुफ़्लिसों
को
कहाँ
मुयस्सर
है
शर्त
दौलत
है
दोस्ती
के
लिए
Shakir Dehlvi
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