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Shakir Dehlvi
pahle pahle to koii zehan men dar ugta hai
pahle pahle to koii zehan men dar ugta hai | पहले पहले तो कोई ज़ेहन में डर उगता है
- Shakir Dehlvi
पहले
पहले
तो
कोई
ज़ेहन
में
डर
उगता
है
फिर
उसी
डर
से
किसी
भूत
का
सर
उगता
है
- Shakir Dehlvi
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हर
शब
इक
ख़्वाब
सलोना
भी
और
धूप
खिले
तक
सोना
भी
बातों
में
उसकी
जाल
भी
है
आँखों
में
जादू
टोना
भी
क्या
शय
है
मोहब्बत
इस
में
सुकूँ
देता
है
तड़पना
रोना
भी
दीदार
का
तालिब
मैं
ही
नहीं
है
घर
का
कोना
कोना
भी
पैदा
करता
है
बेज़ारी
हर
वक़्त
मुयस्सर
होना
भी
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Shakir Dehlvi
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हम
खड़े
रहते
हैं
मुजरिम
की
तरह
महफ़िल
में
उनका
अंदाज़
वकीलों
की
तरह
होता
है
Shakir Dehlvi
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हो
भटकने
का
जिसे
शौक़
मेरे
साथ
चले
जो
हो
मंज़िल
का
तलबगार
पलट
जाए
अभी
Shakir Dehlvi
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यक़ीन
कर
कि
तेरे
ग़म
शनास
हम
भी
हैं
उदास
देख
के
तुझको
उदास
हम
भी
हैं
Shakir Dehlvi
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आप
जैसों
की
दिल-लगी
के
लिए
दिल
हमारे
बनाए
जाते
हैं
Shakir Dehlvi
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