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Shakeel Jamali
ho gaii hai mirii ujadi hui duniya aabaad
ho gaii hai mirii ujadi hui duniya aabaad | हो गई है मिरी उजड़ी हुई दुनिया आबाद
- Shakeel Jamali
हो
गई
है
मिरी
उजड़ी
हुई
दुनिया
आबाद
मैं
उसे
ढूँढ़
रहा
हूँ
ये
बताने
के
लिए
- Shakeel Jamali
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
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मैं
सुख़न
में
हूँ
उस
जगह
कि
जहाँ
साँस
लेना
भी
शा'इरी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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मज़ा
चखा
के
ही
माना
हूँ
मैं
भी
दुनिया
को
समझ
रही
थी
कि
ऐसे
ही
छोड़
दूँगा
उसे
Rahat Indori
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हम
मेहनतकश
इस
दुनिया
से
जब
अपना
हिस्सा
माँगेंगे
इक
बाग़
नहीं,
इक
खेत
नहीं,
हम
सारी
दुनिया
माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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परतव
से
जिस
के
आलम-ए-इम्काँ
बहार
है
वो
नौ-बहार-ए-नाज़
अभी
रहगुज़र
में
है
Ali Sardar Jafri
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई
दे
लहजे
को
सच्चाई
दे
दुनिया
है
जंगल
का
सफ़र
लछमन
जैसा
भाई
दे
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Tariq Shaheen
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वफ़ादारों
पे
आफ़त
आ
रही
है
मियाँ
ले
लो
जो
क़ीमत
आ
रही
है
मैं
उस
से
इतने
वा'दे
कर
चुका
हूँ
मुझे
इस
बार
ग़ैरत
आ
रही
है
न
जाने
मुझ
में
क्या
देखा
है
उस
ने
मुझे
उस
पर
मोहब्बत
आ
रही
है
बदलता
जा
रहा
है
झूट
सच
में
कहानी
में
सदाक़त
आ
रही
है
मिरा
झगड़ा
ज़माने
से
नहीं
है
मिरे
आड़े
मोहब्बत
आ
रही
है
अभी
रौशन
हुआ
जाता
है
रस्ता
वो
देखो
एक
औरत
आ
रही
है
मुझे
उस
की
उदासी
ने
बताया
बिछड़
जाने
की
साअ'त
आ
रही
है
बड़ों
के
दरमियाँ
बैठा
हुआ
हूँ
नसीहत
पर
नसीहत
आ
रही
है
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Shakeel Jamali
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ग़म
के
पीछे
मारे
मारे
फिरना
क्या
ये
दौलत
तो
घर
बैठे
आ
जाती
है
Shakeel Jamali
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मैं
ने
हाथों
से
बुझाई
है
दहकती
हुई
आग
अपने
बच्चे
के
खिलौने
को
बचाने
के
लिए
Shakeel Jamali
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बोलता
है
तो
पता
लगता
है
ज़ख़्म
उसका
भी
हरा
लगता
है
रास
आ
जाती
है
तन्हाई
भी
एक
दो
रोज़
बुरा
लगता
है
कितनी
ज़ालिम
है
मोहज्जब
दुनिया
घर
से
निकलो
तो
पता
लगता
है
आज
भी
वो
नहीं
आने
वाला
आज
का
दिन
भी
गया
लगता
है
बोझ
सीने
पे
बहुत
है
लेकिन
मुस्कुरा
देने
में
क्या
लगता
है
मूड
अच्छा
हो
तो
सब
अच्छा
है
वर्ना
हँसना
भी
बुरा
लगता
है
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Shakeel Jamali
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वो
अपने
ख़ून
से
लिखने
लगी
है
नाम
मेरा
अब
इस
मज़ाक़
को
संजीदगी
से
लेना
है
Shakeel Jamali
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