gulshan ho nigaahon men to jannat na samajhna | गुलशन हो निगाहों में तो जन्नत न समझना

  - Shakeel Badayuni
गुलशनहोनिगाहोंमेंतोजन्नतसमझना
दम-भरकीइनायतकोमोहब्बतसमझना
क्याशयहैमता-ए-ग़म-ओ-राहतसमझना
जीनाहैतोजीनेकीहक़ीक़तसमझना
होख़ैरतिरेग़मकीकिहमनेतिरेग़मसे
सीखाहैमसर्रतकोमसर्रतसमझना
निस्बतहीनहींकोईमोहब्बतकोख़िरदसे
दिलकभीमफ़्हूम-ए-मोहब्बतसमझना
येकिसनेकहातुमसेकिरूदाद-ए-वफ़ाको
सुनकरभीसमझनेकीज़रूरतसमझना
वीरानी-ए-माहौलकोबर्बादी-ए-दिलको
हरदौरमेंआसार-ए-मोहब्बतसमझना
सरख़महोअगरमस्लहत-ए-वक़्तकेआगे
इसजब्र-ए-मुसलसलकोइबादतसमझना
देखेजोतुम्हेंकोईमोहब्बतकीनज़रसे
लिल्लाह'शकील'उसकोमोहब्बतसमझना
  - Shakeel Badayuni
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