bin maange mil raha ho to KHvaahish fuzool hai | बिन माँगे मिल रहा हो तो ख़्वाहिश फ़ुज़ूल है

  - Shahid Zaki
बिनमाँगेमिलरहाहोतोख़्वाहिशफ़ुज़ूलहै
सूरजसेरौशनीकीगुज़ारिशफ़ुज़ूलहै
किसीनेकहाथाटूटीहुईनावमेंचलो
दरियाकेसाथआपकीरंजिशफ़ुज़ूलहै
नाबूदकेसुराग़कीसूरतनिकालिए
मौजूदकीनुमूदनुमाइशफ़ुज़ूलहै
मैंआपअपनीमौतकीतय्यारियोंमेंहूँ
मेरेख़िलाफ़आपकीसाज़िशफ़ुज़ूलहै
आसमानतेरीइनायतबजामगर
फ़सलेंपकीहुईहोंतोबारिशफ़ुज़ूलहै
जीचाहताहैकहदूँज़मीनज़माँसेमैं
मंज़िलअगरनहींहैतोगर्दिशफ़ुज़ूलहै
इनआम-ए-नंग-ओ-नाममिरेकामकेनहीं
मज्ज़ूबहूँसोमेरीसताइशफ़ुज़ूलहै
  - Shahid Zaki
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