अगर दोनों तरफ़ सूरज तराज़ू में नहीं होता

  - Shahid Zaki
अगरदोनोंतरफ़सूरजतराज़ूमेंनहींहोता
तेरासायामेरेसाएकेपहलूमेंनहींहोता
वफ़ादारीकादावागिर्या-ओ-ज़ारीसेक्याकरना
नमकजोख़ूनमेंहोताहैआँसूमेंनहींहोता
मुझेअच्छाकहाँलगताहैबैसाखीमेंढलजाना
मगरमेराशुमारअबदस्त-ओ-बाज़ूमेंनहींहोता
तोक्यातुमहिज्रकेलुग़वीमआनीमेंमुक़य्यदहो
तोक्यातुमकहरहीहोफूलख़ुशबूमेंनहींहोता
सहाराहोहोमैंनावलेजाऊँगासाहिलतक
हुनरमल्लाहमेंहोताहैचप्पूमेंनहींहोता
हरइकउम्मीदकोलाज़िमहैइकज़रख़ेज़मायूसी
उजालारातमेंहोताहैजुगनूमेंनहींहोता
मसाफ़तमुंतज़िरहैबापकीपगड़ीकेपेचोंमें
येवोइदराकहैजोमाँकेपल्लूमेंनहींहोता
मुझेदरवेशकीइसरम्ज़नेज़िंदारखा'शाहिद'
किज़हरएहसासमेंहोताहैबिच्छूमेंनहींहोता
  - Shahid Zaki
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