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Suraj "pathik"
ye jawaani hai dilnasheen sahab
ye jawaani hai dilnasheen sahab | ये जवानी है दिलनशीं साहब
- Suraj "pathik"
ये
जवानी
है
दिलनशीं
साहब
मसअला
इल्म-ए-हुस्न
का
है
बस
- Suraj "pathik"
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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लोग
हर
मोड़
पे
रुक
रुक
के
सँभलते
क्यूँँ
हैं
इतना
डरते
हैं
तो
फिर
घर
से
निकलते
क्यूँँ
हैं
मोड़
होता
है
जवानी
का
सँभलने
के
लिए
और
सब
लोग
यहीं
आ
के
फिसलते
क्यूँँ
हैं
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Rahat Indori
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मैं
अगर
अपनी
जवानी
के
सुना
दूँ
क़िस्से
ये
जो
लौंडे
हैं
मेरे
पाँव
दबाने
लग
जाए
Mehshar Afridi
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ये
जो
ढलती
हुई
जवानी
है
हर
नए
साल
की
कहानी
है
देख
आँखें
मेरी
बता
मुझको
इस
में
किस
नाम
की
निशानी
है
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Aman Mishra 'Anant'
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कच्ची
'उम्रों
में
हमें
काम
पर
लगा
दिया
गया
हम
वो
बच्चे
जो
जवानी
से
अलग
कर
दिए
गए
Shakeel Azmi
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वो
बुज़ुर्गों
की
बताई
तो
कहीं
मिलती
नहीं
अब
दुखों
को
झेलती
ही
बस
जवानी
रह
गई
Parul Singh "Noor"
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सैर
कर
दुनिया
की
ग़ाफ़िल
ज़िंदगानी
फिर
कहाँ
ज़िंदगी
गर
कुछ
रही
तो
ये
जवानी
फिर
कहाँ
Khwaja Meer Dard
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जीने
का
इरादा
है
मगर
फिर
भी
कहीं
से
कोई
तो
इशारा
हो
मिरा
अज़्म
जवाँ
हो
Sohit Singla
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मैंनू
तेरा
शबाब
लै
बैठा,
रंग
गोरा
गुलाब
लै
बैठा
किन्नी
पीती
ते
किन्नी
बाकी
ए
मैंनू
एहो
हिसाब
लै
बैठा
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Shiv Kumar Batalvi
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अदा
है
ख़ूब
पैकर
में
तिरी
जाँ
जानती
हो
क्या
न
जाने
हुस्न
ये
कितने
कलमकारों
को
ले
डूबा
Suraj "pathik"
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सहने
में
अब
दुश्वारी
है
यूँँ
ग़म
मेरा
सरकारी
है
हाँ
कुछ
यारी
मक्कारी
है
औ
कहते
ये
हुश्यारी
है
अपनी
भी
कोई
दुनिया
है
अपनी
भी
दुनिया
दारी
है
प्रेम
सरस
में
जीना
सीखा
औ
जीना
उस
में
जारी
है
चलते
चलते
थक
जाता
हूँ
बस
थोड़ी
जिम्मेदारी
है
हर
दिन
तुम
में
ही
जीता
हूँ
यार
यही
इक
बीमारी
है
तन
मन
जीवन
सब
नश्वर
है
बस
मरने
की
तैयारी
है
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Suraj "pathik"
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यही
है
आरज़ू
बस
आप
से
दिलबर
जरा
दिल
तोड़िए
आहिस्ता
आहिस्ता
Suraj "pathik"
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दिल
बड़ा
ही
था
सुकूँ
में
क्यूँँ
'पथिक'
दफ़अतन
जो
आप
से
मिलना
हुआ
Suraj "pathik"
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दर्द-ए-दिल
ज़िंदगी
नाम
है
रोइए
इश्क़
आज़ार
अंजाम
है
रोइए
रायगाँ
रात
जो
काटनी
है
मुझे
हाथ
में
आख़िरी
जाम
है
रोइए
बारहा
दरमियाँ
दूरियाँ
मिट
रही
ज़ीस्त
में
बस
यही
काम
है
रोइए
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Suraj "pathik"
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