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Sandeep dabral 'sendy'
vo to main hooñ jo ab tak theek-thaak hooñ varna
vo to main hooñ jo ab tak theek-thaak hooñ varna | वो तो मैं हूँ जो अब तक ठीक-ठाक हूँ वरना
- Sandeep dabral 'sendy'
वो
तो
मैं
हूँ
जो
अब
तक
ठीक-ठाक
हूँ
वरना
ये
इतने
ग़म
और
किसी
को
पागल
कर
देते
- Sandeep dabral 'sendy'
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अपनी
तबाहियों
का
मुझे
कोई
ग़म
नहीं
तुम
ने
किसी
के
साथ
मोहब्बत
निभा
तो
दी
Sahir Ludhianvi
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ये
ग़म
हमको
पत्थर
कर
देगा
इक
दिन
कोई
आ
कर
हमें
रुलाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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भला
तुम
कैसे
जानोगे
मिला
है
दर्द
जो
गहरा
वो
जैसे
नोचता
है
बाल
अपने
नोच
कर
देखो
Kushal "PARINDA"
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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दीदा
ओ
दिल
ने
दर्द
की
अपने
बात
भी
की
तो
किस
से
की
वो
तो
दर्द
का
बानी
ठहरा
वो
क्या
दर्द
बटाएगा
Ibn E Insha
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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दर्द
मिन्नत-कश-ए-दवा
न
हुआ
मैं
न
अच्छा
हुआ
बुरा
न
हुआ
Mirza Ghalib
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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बे-नाम
सा
ये
दर्द
ठहर
क्यूँँ
नहीं
जाता
जो
बीत
गया
है
वो
गुज़र
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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यतीमों
की
तरह
बस
पाल
रक्खा
है
इन्हें
हमने
हमें
जो
दुख
मिले
हैं
वो
हमारे
दुख
नहीं
लगते
किसी
की
आँख
में
रहकर
किसी
के
ख़्वाब
देखे
हैं
हजारों
कोशिशें
की
पर
किनारे
दुख
नहीं
लगते
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Rohit Gustakh
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लहरों
में
डूबती
कश्ती
को
बस
किनारा
यहाँ
चाहिए
रंज
में
हर
दफ़ा
मशवरा
नइँ
सहारा
यहाँ
चाहिए
लौट
वापस
यहाँ
आती
मायूस
चेहरों
पे
फिर
रंगतें
खिलखिलाते
लबों
का
फ़क़त
इक
इशारा
यहाँ
चाहिए
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Sandeep dabral 'sendy'
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बैठ
तन्हा
बख़्त
का
रोना
न
रोते
हम
यहाँ
पर
गर
लकीरों
से
लकीरें
हाथ
की
मिलती
हमारी
Sandeep dabral 'sendy'
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तुम
बात
हक़ीक़त
में
खोने
की
क्या
करते
हो
उसको
सपनों
में
खोने
से
भी
डरता
हूँ
मैं
Sandeep dabral 'sendy'
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करके
भी
यहाँ
रत्तीभर
न
कर
सकोगे
कुछ
पूजे
देवता
ही
जब
दाग़दार
निकलेंगे
Sandeep dabral 'sendy'
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वक़्त
रहते
लौट
आना
देर
तुम
सेे
हो
न
जाए
बाद
में
हो
वक़्त
ज़्यादा
पर
कहीं
हम
हों
न
जग
में
Sandeep dabral 'sendy'
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