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Sandeep dabral 'sendy'
vaqt rahte laut aanaa der tumse ho na jaa.e
vaqt rahte laut aanaa der tumse ho na jaa.e | वक़्त रहते लौट आना देर तुम सेे हो न जाए
- Sandeep dabral 'sendy'
वक़्त
रहते
लौट
आना
देर
तुम
सेे
हो
न
जाए
बाद
में
हो
वक़्त
ज़्यादा
पर
कहीं
हम
हों
न
जग
में
- Sandeep dabral 'sendy'
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वक़्त
हर
ज़ख़्म
का
मरहम
तो
नहीं
बन
सकता
दर्द
कुछ
होते
हैं
ता-उम्र
रुलाने
वाले
Sada Ambalvi
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कोई
चादर
वफ़ा
नहीं
करती
वक़्त
जब
खींच-तान
करता
है
Unknown
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मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
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Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हारे
साथ
इतना
ख़ूब-सूरत
वक़्त
गुज़रा
है
तुम्हारे
बाद
हाथों
में
घड़ी
अच्छी
नहीं
लगती
Madhyam Saxena
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जो
ज़रा
ठीक
से
किरदार
निगारी
हो
जाए
ये
कहानी
तो
हक़ीक़त
पे
भी
तारी
हो
जाए
तेरे
हामी
है
सो
उठ
कर
भी
नहीं
जा
सकते
जाने
किस
वक़्त
यहाँ
राय-शुमारी
हो
जाए
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Khurram Afaq
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उस
वक़्त
भी
अक्सर
तुझे
हम
ढूँढने
निकले
जिस
धूप
में
मज़दूर
भी
छत
पर
नहीं
जाते
Munawwar Rana
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तब
हम
दोनों
वक़्त
चुरा
कर
लाते
थे
अब
मिलते
हैं
जब
भी
फ़ुर्सत
होती
है
Javed Akhtar
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बहन
ने
बाँध
कर
राखी
बचा
ली
ज़िंदगी
वर्ना
ज़रा
सा
वक़्त
बाक़ी
था
हमारी
नब्ज़
थमने
में
Harsh saxena
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था
इंतिज़ार
मनाएँगे
मिल
के
दीवाली
न
तुम
ही
लौट
के
आए
न
वक़्त-ए-शाम
हुआ
Aanis Moin
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ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
Kashif Sayyed
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सब
कुछ
देख
नज़र
फिर
भी
ख़ाली
ख़ाली
सी
है
यार
बहुत
दिन
से
हँसता
मज़दूर
नहीं
देखा
Sandeep dabral 'sendy'
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मेरे
महबूब
के
क़रीब
बहुत
शहर
में
हैं
भरे
रक़ीब
बहुत
है
ज़रूरत
नहीं
मुझे
अदू
की
याँ
हैं
साहब
मिरे
हबीब
बहुत
मुद्दों
की
नेता
क्यूँ
करें
चिंता
उस
लिए
हैं
यहाँ
ग़रीब
बहुत
मर
गए
वो
कमी
से
उनकी
जो
कहते
थे
हैं
मियाँ
तबीब
बहुत
बहर
में
क्यूँ
नहीं
अभी
ग़ज़लें
पास
मेरे
तो
हैं
अदीब
बहुत
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Sandeep dabral 'sendy'
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देखनी
है
गर
क़ज़ा
से
पहले
एक
और
क़ज़ा
तो
किसी
से
बे-पनाह
इश्क़
करके
देख
लो
Sandeep dabral 'sendy'
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मुझे
जीने
नहीं
देती
सुकूत-ए-शब
नहीं
इतना
सताओ
लौट
आओ
अब
Sandeep dabral 'sendy'
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चोला
ख़ामोशी
का
ओढ़
लिया
वरना
बोलते
हम
भी
अच्छा
थे
Sandeep dabral 'sendy'
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